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इंदीवर का विमोचन

२२ अक्टूबर २०१९ को हिंदी राइटर्स गिल्ड द्वारा प्रकाशित एक और महत्वपूर्ण काव्य पुस्तक 'इंदीवर' का विमोचन किया गया। 'इंदीवर' डॉक्टर शिवनंदन सिंह यादव की तीसरी पुस्तक है। इससे पूर्व उनके दो और काव्य ग्रंथों का प्रकाशन 'चन्दन वन' तथा 'प्रियंवदा' नाम से हो चुका था। इंदीवर के काव्य संयोजन, टंकण तथा सम्पादन का कार्य श्री सुमन कुमार घई जी ने अत्यंत दक्षतापूर्वक किया। 'इंदीवर' के विमोचन का आयोजन हिंदी राइटर्स गिल्ड द्वारा किया गया। अस्वस्थता के कारण डॉक्टर यादव हिंदी राइटर्स गिल्ड की मासिक सभा में जाने से असमर्थ थे, अतः यह कार्यक्रम श्री अरुण बर्मन तथा श्रीमती आशा बर्मन के निवास पर संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में भाग लेने वालों के नाम इस प्रकार हैं :

श्रीमती शैलजा सक्सेना, श्री सुमन कुमार घई, श्री विजय विक्रांत, श्रीमती कांता विक्रांत, श्री सौभाग्य सिंघवी, श्रीमती स्नेह सिंघवी, श्रीमती शैल शर्मा, श्रीमती अरुणा भटनागर, श्रीमती इंदिरा वर्मा,श्री राज माहेश्वरी, श्रीमती मीना माहेश्वरी, श्री अजय बर्मन, श्रीमती रेखा बर्मन, श्री अरुण बर्मन तथा श्रीमती आशा बर्मन।

कार्यक्रम के आरम्भ में स्वादिष्ट भोजन का आयोजन किया गया था। उसके पश्चात् श्रीमती आशा बर्मन ने मुख्य अतिथि डॉक्टर साहब का स्वागत करते हुए उन्हें उनकी तीसरी पुस्तक के प्रकाशन पर बधाई दी। आशाजी ने डॉक्टर साहब से सम्बंधित पुरानी स्मृतियों को सांझा किया। आठवें दशक से ही वे टोरोंटो के हिंदी के रचनात्मक कार्यों से जुड़े हुए हैं। 

उन दिनों एक मासिक गोष्ठी का आयोजन किया जाता था डॉक्टर साहब न केवल उसके संचालक थे वरन वे हिंदी के नवोदित लेखकों को लिखने के लिए प्रेरित करते व् उनका मार्ग दर्शन भी करते। आशा जी उनसे उसी गोष्ठी में मिलीं। इस सभा में उपस्थित श्रीमती स्नेह सिंघवी तथा श्रीमती शैल शर्मा भी उसी गोष्ठी की सदस्या रही हैं। उन्होंने भी डॉक्टर यादव को बधाई दी तथा शैलजी ने आठवें दशक के कवियों को लेकर एक स्वरचित रोचक कविता पढ़कर सबका मनोरंजन किया।

टोरंटो की अत्यधिक सम्मानित कवयित्री श्रीमती अचला दीप्ति कुमार भी वर्षों से डॉक्टर यादव डॉक्टर यादव तथा विमला जी के घनिष्ट मित्रों में से हैं। उन्होंने डॉक्टर साहब के लिए एक शुभकामनाओं से भरी एक कविता विनीपेग से फोन पर सुनकर सबके साथ सांझा की, जिसकी कुछ पंक्तियाँ हैं,        
         
जीवन में कतिपय ही जन ऐसे मिल जाते, 
लगता जैसे संग गुँथे, हैं जन्मों के नाते। 
संपर्क डॉक्टर दम्पति का ऎसी ही निधि है, 
भाग्य हमारा, हमें मिलानेवाली विधि है।

श्री राज माहेश्वरी जी ने भी एक स्वरचित कविता डॉक्टर यादव को भेंट की।

डॉक्टर शैलजा सक्सेना ने बताया कि किस प्रकार प्रथम साक्षात्कार में ही वे डॉक्टर यादव से प्रभावित हो चुकी थीं। उन्होंने बताया कि अब तक डॉक्टर यादव की १००० से भी अधिक कवितायें प्रकाशित हो चुकी हैं। तदुपरांत श्री सुमन कुमार घई, श्री विजय विक्रांत, श्रीमती अरुणा भटनागर, श्रीमती इंदिरा वर्मा ने भी अपने विचार व्यक्त किये। 

डॉक्टर यादव ने भी सबके अनुरोध पर अपनी कुछ रचनाएँ पढ़ीं तथा इतने सुन्दर आयोजन के लिए सबको धन्यवाद दिया। इसमें कोई संदेह नहीं कि इंदीवर भी डॉक्टर यादव की अन्य पुस्तकों की भाँति ही सराही जाएगी। भाव, विषय, छंद और अभिव्यक्ति सभी दृष्टियों से डॉक्टर यादव की रचनाएँ उत्कृष्ट कोटि की हैं। एकबार पुनः उन्हें हिंदी राइटर्स गिल्ड की ओर से बहुत-बहुत बधाई !

प्रस्तुति: आशा बर्मन

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