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मोहन राकेश, कमलेश्वर, जयशंकर प्रसाद को याद करते हुये कहानी पर बातचीत

१३ जनवरी २०१८ हिंदी रायटर्स गिल्ड की मासिक रिपोर्ट

 

हिंदी राइटर्स गिल्ड कैनेडा की बहुआयामी जानी मानी संस्था है और अपने नए नए प्रयासों के लिए जानी जाती है। १३ जनवरी २०१८ की कड़कती ठण्ड में चिन्कुज़ी लाइब्रेरी में लेखकों और श्रोताओं ने अपनी उपस्तिथि से हिंदी साहित्य के प्रति अपने प्रेम का परिचय दिया। इस कार्यक्रम को दो सत्रों में प्रस्तुत किया गया।

यह गोष्ठी दोपहर के २ बजे शुरू हुई। सभी ने एक दूसरे को नव वर्ष, लोहरी और मकरसंक्रांति की शुभकामनाएं दीं।डॉ शैलजा सक्सेना (संस्थापक निदेशिका हिंदी रायटर्स गिल्ड) ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए सभी का स्वागत किया और पहले सत्र में  उस दिन के विषय, “मोहन राकेश, जयशंकर प्रसाद और कमलेश्वर के लेखों पर अपने विचार” प्रस्तुत करने के लिए सर्वप्रथम श्री अखिल भंडारी को मंच पर आमंत्रित किया। उन्होंने मोहन राकेश की कहानी “मलबे का मालिक” के बारे में बताते हुए बहुत सी बातों पर अपनी टिपण्णी की। डॉ जगमोहन सांगा  ने भी मोहन राकेश की कहानी “अंतराल” के बारे में बताते हुए अपने विचार प्रस्तुत किये। श्रीमती प्रमिला भार्गव ने कमलेश्वर को एक महान लेखक बताते हुए उनकी कुछ प्रसिद्ध कहानियों की चर्चा की।श्रीमती भुवनेश्वरी पाण्डेय ने मोहन राकेश की कहानी “सीमाएं” पर अपने विचार व्यक्त किये।डॉ शैलजा सक्सेना ने जय शंकर प्रसाद के कामायनी जैसे महाकाव्य और अजात शत्रु, ध्रुव स्वामिनी जैसे बड़े नाटकों की चर्चा की।जय शंकर प्रसाद के देशप्रेम की अटूट भावना से भी सभी को अवगत कराया।

  श्री धर्म जैन और डॉ हंसा दीप द्वारा आयोजित लड्डू और कचौरी, श्री विद्या भूषण धर द्वारा आयोजित समोसों तथा श्रीमती कृष्णा वर्मा द्वारा परोसी गयी बर्फ़ी का सभी ने भरपूर आनंद उठाया|

दूसरे सत्र में  कहानी और लघु कथा का दौर चला। डॉ हंसा दीप ने “फौजी”, श्रीमती सविता अग्रवाल ने “कृतज्ञ आँखें”, श्रीमती कृष्णा वर्मा ने “नज़रिया” और “आस्था”, विद्या भूषण धर ने बहुत मार्मिक कहानी “अनोखी रात”, श्रीमती भुवनेश्वरी पाण्डेय ने “आज की सती”,  श्री नरेन्द्र ग्रोवर ने “पत्थर की अपनी यात्रा”, श्री सुमन घई (संस्थापक निदेशक हि.रा.गी) ने “सुबह साढ़े  सात से पहले”, श्रीमती मधु भार्गव ने एक लघु कथा की प्रस्तुति की। डॉ शैलजा सक्सेना ने “शार्त्र” कहानी प्रस्तुत की। श्री सुमन जी ने सब की कहानियों की समालोचना की। अंत में श्री ताहिर गोरा ने हिंदी और उर्दू भाषा को भारत की भाषा बताते हुए कुछ कहानियों पर अपने विचार व्यक्त किये।

इस प्रकार यह गोष्ठी अत्यंत सफलता के साथ समाप्त हुई।       

 

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