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मासिक गोष्ठी अक्टूबर

हिन्दी राइटर्स गिल्ड की अक्तूबर मास की गोष्ठी

13अक्तूबर, 2018 शनिवार को हिन्दी राइटर्स गिल्ड की मासिक गोष्ठी ब्रैम्पटन लाइब्रेरी की स्प्रिंगडेल शाखा, ब्रैम्पटन में संपन्न हुई। संचालक श्री सुमन कुमार घई ने गोष्ठी को आरम्भ करते हुए उपस्थित लेखकों और श्रोताओं का स्वागत किया। इस बार गोष्ठी में वक्ताओं को कविता के अलावा लघु-कथा की प्रस्तुति का आमन्त्रण था।

पहली प्रस्तुति श्रीमती आशा बर्मन की थी। उन्होंने एक लघुकथा प्रस्तुत की जिसमें उन्होंने स्वदेश लौटे आप्रवासी अनुभव को शब्दों में ढाला था। श्रीमती भुवनेश्वरी पाण्डे ने “फूलों का व्यापार” गद्य रचना में फूलों को इतना सजीव कर दिया कि फूल मालिन की मानसिकता के देखते हुए खिल और झड़ रहे थे। श्रीमती कृष्णा वर्मा ने अपनी मार्मिक लघुकथा “बोझ” में बच्ची के मासूम प्रेम से कठोर और क्रूर हदय को मोम की तरह पिघला दिया। आचार्य संदीप त्यागी “दीप” ने अपने काव्य संग्रह “सांझ” से एक प्रेम-गीत प्रस्तुत किया। श्रीमती पूनम चन्द्रा मनु ने हिमांशु जी लघुकथा “नवजन्मा” का पाठ किया। श्री रामेश्वर काम्बोज ’हिमांशु’ जी ने कई मुक्तक सुनाए, जिन्हें श्रोताओं ने बहुत सराहा। श्री अखिल भण्डारी की ग़ज़ल बहुत पसन्द की गई। श्री सतीश सेठी पहली बार हिन्दी राइटर्स गिल्ड की गोष्ठी में उपस्थित हुए थे। उन्होंने अपनी कविता “दुनिया” मे प्रौढ़ावस्था की नकारत्मक मानसिकता को बदलने की प्रेरणा दी। श्री बालकृष्ण शर्मा जी ने अपनी एक छोटी सी कविता “प्रश्न” प्रस्तुत की। श्री विजय विक्रान्त जी ने “डायरी का एक पन्ना” शृंखला को जारी रखते हुए इस बार हास्य और व्यंग्य से भरपूर “यमराज का एक दिन” का पाठ किया। डॉ. नरेन्द्र ग्रोवर ने पहले एक पहेलीनुमा “टिप्पणी” में व्हाट्स ऐप्प पर अनचाहे संदेशों के प्रति व्यंग्यात्मक शिकायत दर्ज की और अपनी एक गंभीर रचना सुनाई। श्रीमती आशा मिश्रा जो हमेशा श्रोता के रूप में उपस्थित रहती हैं, इस बार अज्ञेय की कविता का पाठ किया। भारत से पधारीं उनकी बहन श्रीमती सुषम लाहरी ने कुमार विश्वास की लिखी कविता सुनाई जिसमें आप्रवासी के हृदय की पीड़ा का वर्णन था। श्री राज माहेश्वरी जी ने एक संस्मरण सुनाया कि किस तरह नवजन्मा बहन के स्पर्श मात्र से उनके नाती की अपनी बहनों के प्रति रोषपूर्ण अवधारणा बदल गई। डॉ. रत्नाकर नराले जो अभी गत दिनों मॉरीशियस में हुए हिन्दी सम्मेलन में सम्मानित हुए थे, ने मॉरीशियस का प्रशंसा गीत सस्वर सुनाया। श्री सुमन कुमार घई ने अपनी एक पुरानी कविता “खो चुका परिचय” का पाठ किया। श्री सुमन कुमार घई ने अपने काव्य पाठ के बाद श्री रामेश्वर काम्बोज ’हिमांशु’ जी को आज की प्रस्तुत रचनाओं पर अपने विचार प्रकट करने के लिए आमन्त्रित किया। हिमांशु जी ने केवल गद्य रचनाओं पर अपनी टिप्पणी देते हुए लघुकथा के सूक्ष्म बिन्दुओं पर चर्चा की। उन्होंने रचनाओं में विराम चिह्नों के उचित प्रयोग को भी महत्वपूर्ण कहा ताकि पाठक रचना को पढ़ते हुए रचना को उचित प्रकार से समझ सकें। 

गोष्ठी का अंत श्री इक़बाल बरार ने “कल चमन था आज सहरा हुआ” गीत गा कर किया।

कार्यक्रम के अंत में 18 नवम्बर को मंचित किए जाने वाले नाटक “उधार का सुख” की सूचना देते हुए सुमन कुमार घई ने सभी को इस नाटक को देखने के लिए आमंत्रित किया।