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15 अगस्त -सुगंध माटी की

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15 अगस्त -सुगंध माटी की,अमृत महोत्सव

भारत वर्ष के इतिहास में 15 अगस्त 2021 का दिन स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा । आज भारत की स्वतंत्रता की 75 वीं सालगिरह है। यह दिन सारे विश्व में अमृत महोत्सव के रूप में मनाया गया। हिन्दी राइटर्स गिल्ड ने भी इस महोत्सव को मनाने के लिए फेसबुक लाइव का आयोजन किया, जिसमें हिन्दी राइटर्स गिल्ड से जुड़े कवि कवयित्रियों ने स्वदेश से संबंधित स्वरचित रचनाएं पढ़ीं और मातृभूमि को अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किए। सर्वप्रथम डॉ शैलजा सक्सेना ने सभी वक्ताओं तथा दर्शकों का स्वागत किया तथा उन्हें स्वतंत्रता दिवस के 75 वें वर्षगांठ की बधाई दी इसके पश्चात् श्रीमती मानोशी चैटर्जी जी ने अपने सुमधुर स्वर में 'वंदे मातरम गाया' ।अनुरोध करने पर उन्होंने बालकृष्ण शर्मा नवीन जी का एक और उद्बोधन गीत भी प्रस्तुत किया 'कोटि-कोटि कंठों से निकली आज यही स्वरधारा है,भारतवर्ष हमारा है हिंदुस्तान हमारा है।'
इसके पश्चात् हिन्दी राइटर्स गिल्ड के निदेशक श्री विजय विक्रांत जी ने टोरंटो की भारत की काउंसिलाधीश श्रीमती अपूर्वा श्रीवास्तव जी को मंच पर बुलाया तथा उनका परिचय दिया । अपूर्वा जी ने बताया कि हम भारतवासी भाग्यशाली है कि यह दिन मना रहे हैं ।शहीदों को याद करने के साथ-साथ बताया कि भारतवर्ष विकास पथ पर तीव्र गति से अग्रसर हो रहा है ।
इसके उपरान्त विक्रांत जी ने संदीप कुमार तथा उनकी धर्मपत्नी कामिनी जी को कार्यक्रम के सञ्चालन के लिये आमंत्रित किया तथा उनका परिचय दिया ।
संदीप कुमार जी कार्यक्षेत्र में एक अभियंता है लेकिन साथ ही कविता के लेखन में और नाटक में अत्यंत रुचि रखते हैं। हिन्दी राइटर्स गिल्ड द्वारा मंचित एक नाटक 'उधार का सुख 'में उन्होंने प्रमुख नायक का अत्यंत सफल अभिनय किया था ।
उनकी पत्नी कामिनी सिंह जी दो बच्चों की माँ है और इसके साथ ही सामाजिक कार्य में उनकी रुचि है । वे संगीत और नृत्य में भी पारंगत हैं। सर्वप्रथम कामिनी जी ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों को सम्मान दिया। इसके पश्चात संदीप जी ने कविता पाठ के संचालन कार्य आरंभ किया ।
सर्वप्रथम संदीप जी ने श्रीमती आशा बर्मन को कविता पाठ के लिए आमंत्रित किया और उनका परिचय भी दिया कि उन्होंने कविता ,नाटक, गीत इत्यादि लिखे हैं । आशा जी ने वक्ताओं तथा श्रोताओं को इस महत्वपूर्ण दिवस की बधाई दी और धन्यवाद भी दिया । उन्होंने अपनी एक रचना प्रस्तुत की जिसका शीर्षक था ‘अपराध बोध’ यह अपराध बोध क्या है और यह उचित है कि नहीं इसकी भी व्याख्या की । कविता में ही उन्होंने बताया कि प्रवास में रहते हुए भारत से आये हुए लोगों के मन में कई बार अपराध बोध की भावना होती है, पर यह उचित नहीं है क्योंकि भारतीय संस्कृति में जन्म दात्री माँ के साथ साथ भरण पोषण करने वाली माँ को भी उतना ही सम्मान दिया है । अतः प्रवासी होकर स्वदेश से दूर रहने पर अपराध बोध की भावना निर्मूल है ।
इसके बाद मंच पर आयीं श्रीमती कृष्णा वर्मा जिन्होंने कविता के साथ-साथ लघुकथा, हाइकु की भी रचनाएं की हैं और साथ ही वे एक सफल अभिनेत्री भी हैं जिन्होंने हिन्दी राइटर्स गिल्ड के कई नाटकों में भाग लिया है । उन्होंने अपनी कविता ‘आजादी का मोल’ सुनाई, जिसके अंतर्गत उन्होंने बताया कि भारतवासियों ने अनेक बलिदान और त्याग के पश्चात आजादी पाई थी ।
इसके पश्चात इंदिरा वर्मा जी ने अपनी कविता ‘मैं हवा हूं’ कविता सुनाई जिसमें भारत की माटी की गंध समाई थी । इसके उपरांत मानोशी चटर्जी जी ने अपनी कविता सुनायी 'गर्मी के दिन फिर से आए । ' मातृभूमि को आदर से स्मरण करते हुए इस सुंदर कविता में भारत की भीषण गर्मी का एक सुंदर चित्र अंकितथा । एक पंक्ति है 'लगी बरसने खूब गरज कर बड़ी-बड़ी बूंदे सहसा ही ' इसमें बिम्ब सुंदर थे, जिसने सबका मन मोह लिया ।
इसके पश्चात् अपनी कविता पढ़ने के लिए आए डॉक्टर नरेंद्र ग्रोवर, जो व्यवसाय से तो एक पशु चिकित्सक हैं पर बहुत अच्छी कविताएं और व्यंग्य लिखते हैं । प्रत्येक शनिवार को हिन्दी में रेडियो का कार्यक्रम भी प्रस्तुत करते हैं। उनकी कविता में यह भाव था कि सच्चे अर्थों में भारत को अभी भी आजादी नहीं मिल पाई है क्योंकि अभी भी वहाँ भ्रष्टाचार है, गरीबी है, इत्यादि 'प्रजातंत्र को प्रजा के घर पहुंचाना बाकी है' । यह एक सुन्दर व्यंग्य रचना थी । इसके उपरांत संदीप कुमार जी ने उन साहित्यकारों का उल्लेख किया जिनकी उद्बोधन कविताओं ने स्वतंत्रता संग्राम काल में समय-समय पर लोगों के जनमानस में में शक्ति का संचार किया ,जैसे रवींद्रनाथ, जयशंकर प्रसाद इत्यादि ।
इसके उपरांत श्रीमती प्रीति अग्रवाल मंच पर आयीं । वे कविता के अलावा लघु कथा और हाइकु भी लिखती हैं । उन्होंने अपनी एक कविता ‘प्रवासी मन’ पढ़ी, जिसमें उन्होंने बताया कि उनकी कविताओं में, उनके भावों तथा संस्कारों में देश रचा बसा रहता है, उनकी कविता से एक पंक्ति है ‘उसकी माटी में मैं, मेरी माटी में वह।’ हिन्दी राइटर्स गिल्ड की एक अभिन्न सदस्य पूनम चंद्र मनु ने अगली कविता पढ़ी ‘यह वीरों की धरती है’ ‘जिसकी एक पंक्ति है ‘अगर देश के लिए मर नहीं सकते ,तो दुश्मन की जान लेने जा रहे वीरों की चरण धूल ही ले लो।’ मनु जी ने अत्यंत ओजपूर्ण वाणी में यह कविता पढ़ी और जिसकी लोगों ने बहुत प्रशंसा की । इसके पश्चात इस कवि सम्मेलन में जुड़ती है श्रीमती रेणुका शर्मा जी इन्होंने अपनी कविता में भारत के महापुरुषों को याद किया । डॉक्टर रेणुका शर्मा सासकटून में रहती है अत्यंत शिक्षित भी हैं इनके काव्य संग्रह का नाम है’ एक धुला आसमान ’ । बहुआयामी व्यक्तित्व की धनी रेणुका जी ने एक कविता पढ़ी जिसका शीर्षक था ‘स्वतंत्रता दिवस’ इसमें देश की पुरानी स्मृतियों को उन्होंने साँझा किया जो देश की सीमा से परे है । अगले कवि समीर लाल जी मंच पर आए जो व्यंग्य रचनाओं के लिए प्रसिद्ध है । साथ ही में लघु कथाएं तथा कविताएं भी लिखते हैं । इनका एक ब्लॉग ‘उड़नतश्तरी’ के नाम से प्रसिद्ध है । उन्होंने सुंदर कविता पढ़ी ‘मैं जिंदगी की किताब में अपना पसंदीदा कलाम लिखता हूं|
लिख देता हूं तुम्हारा नाम अब तुम को सलाम लिखता हूं। ’
सब ने इस पंक्ति को बहुत पसंद किया ।
इसके बाद संदीप जी ने बताया कि हमारी बचपन की मीठी यादें इस कवि सम्मेलन में उभरकर बार बार आ रही हैं । इसके पश्चात उन्होंने सौम्य स्वभाव संयुक्त श्रीमती सविता अग्रवाल को मंच पर निमंत्रित किया ,जिन की पुस्तक का नाम है 'भावनाओं के भंवर से'। उन्होंने अपनी कविता में ओजपूर्ण स्वर में स्वतंत्रता संग्राम का चित्रण किया । संदीप जी ने डॉ शैलजा सक्सेना जी को काव्य पाठ के लिये आमंत्रित किया,जो हमारी हिन्दी राइटर्स गिल्ड की सहसंस्थापिका हैं । उन्होंने कहा कि ये हमारी संस्था की रीढ़ की हड्डी हैं। शैलजा ने अत्यंत विनम्रपूर्वक अपने सारे कार्यों का श्रेय निदेशक मंडल को दे दिया और सभी भारतीय भारतवंशियों को बधाई भी दी । संचालकों को भी बधाई दी सुंदर संचालन के लिए और उन्होंने देशवासियों के लिए आज के उत्सव पर एक स्वरचित दोहा पढ़ा नूर रहे, सोना रहे, रहे आप में ताप,
जलधार मन बरसा करें खिलें फूल से आप
इसके पश्चात उन्होंने अपनी एक कविता पढ़ी जिसका शीर्षक था 'वंदे मातरम' जिसमें उन्होंने पुरखों ने जो संस्कृति की विरासत हमें दी है उसके प्रति कृतज्ञता जताई । इस सुंदर कविता की कुछ पंक्तियां इस प्रकार हैं ,
नानक, मीरा, सूर, कबीरा अतिथि से आंगन में आए,
अपने मधुर स्वरों में सबने जाने कितने ही पद गाये ,
मेरी सारी सोच उन्हीं के डीएनए से बनी हुई है,
मेरे खुद के कार्य सभी एक प्रभारी के हैं ।
मेरे सारे शब्द उधारी के हैं ।
उस कविता के एक एक शब्द श्रोताओं पर अमिट छाप बनकर अंकित हो गए ।
इसके पश्चात कामिनी जी ने तिरंगे झंडे के संबंध में कुछ ऐतिहासिक तथ्य प्रस्तुत किए । रवीन्द्रनाथ जी ने जन गण मन का जो गाना 1911 में लिखा था , वह 1950 में भारत का राष्ट्रगान घोषित किया गया । इसके बाद संदीपजी जी ने साहित्य कुंज के प्रणेता तथा हिन्दी राइटर्स गिल्ड के सहसंस्थापक श्री सुमन घई जी को काव्य पाठ के लिए बुलाया । उन्होंने अपनी कविता में प्रवासी की विडंबना का चिंतन प्रस्तुत किया । कविता थी, ‘अतीत भूलता नहीं, वर्तमान पहचानता नहीं और भविष्य जानता नहीं, इस त्रिशंकु में रहूंगा तो कब तक?’ कामिनी जी ने भारत की उपलब्धियों की भी बात की कि योग का आरंभ भारत में हुआ और आज सारे विश्व में फैल गया है, भारतीय हर क्षेत्र में अब विकास पथ पर अग्रसर हैं ।
इसके पश्चात विक्रांत जी मंच पर आए। वे पेशे से इंजीनियर हैं पर हिन्दी में गहरी रुचि है। वे अनेक संस्थाओं से जुड़े हैं। उन्होंने कई संस्मरण कविताएं लिखी हैं। वे भी हिन्दी राइटर्स गिल्ड के सहसंस्थापक हैं ।उन्होंने अपनी कविता में उन्होंने अतीत की कई स्मृतियों को सांझा किया और सभी जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की ।
इसके पश्चात श्री योगेश ममगई जी ने स्वदेश की यादों को कविता के माध्यम से प्रस्तुत किया जिसकी पंक्ति है,
‘ सुगंध मेरी माटी की मैं लाता कैसे?
माँ थी वह मेरी, उसे रुलाता कैसे?
कविता की आरंभिक इन पंक्तियों ने ही श्रोताओ को बांध लिया । अंतिम कवयित्री एक नवीनतम रचना के साथ मंच पर आयीं जिनका नाम था वंदिता सिन्हा । तिरंगे को प्रणाम करते हुए उन्होंने अपनी कविता पढ़ी जिसका शीर्षक था ‘हमेशा दीप जलाएंगे’
एक चेतक गिरा तो क्या, सौ-सौ चेतक दौड़ाएँगे.."
एक मिल्खा नहीं, हम कई मिल्खा दौड़ाएंगे ।
हम ऐसा दीप जलाएंगे’ । एक नया दृष्टिकोण! वाह!
इसके बाद इस कार्यक्रम के संचालक संदीप जी इस आभासी मंच पर आये |
वे एक अभियंता हैं पर हिन्दी भाषा के प्रति बहुत समर्पित भी हैं | एकल नामक संस्था के साथ युक्त होकर समाज सेवा से भी जुड़े रहते हैं । संदीप जी ने अपनी कविता में स्वदेश की मधुर स्मृतियों को सबके साथ साँझा किया । अंत में शैलजा जी ने आशा बर्मन जी को मंच पर धन्यवाद देने के लिए आमंत्रित किया ।
आशा जी ने भावुकता भरे स्वर में यह कहा कि उन्हें गर्व है कि वे हिन्दी राइटर्स गिल्ड जैसी संस्था से आरम्भ से ही जुड़ी हैं , जो इतने सुंदर सफल कार्यक्रम कर पा रहे हैं । उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के लिये धन्यवाद के पात्र कई लोग हैं । सबसे पहले अपूर्वा जी को धन्यवाद दिया उत्साहवर्धन बातों के लिए । इसके पश्चात सुंदर संचालन के लिए संदीप जी और कामिनी जी को धन्यवाद किया, जिन्होंने एक परंपरा से हटकर सञ्चालन को केवल कवि - परिचय तक ही सीमित नहीं रखा वरन उन्होंने स्वदेश के अनेक महत्वपूर्ण तथ्यों से श्रोताओं को परिचित कराया । आज के इस कार्यक्रम को कई सौ लोगों ने फेसबुक में देखा और फेसबुक में अपने विचार प्रस्तुत किए और हिन्दी राइटर्स गिल्ड को एक विविधता पूर्ण मनोरंजक कार्यक्रम के लिए धन्यवाद दिया ।
अंत में आशा जी ने कहा कि सभी रचनाकारों ने अपनी रचनाएं सुनायीं, सबके भाव , शैली तथा छंद भिन्न थे पर मूलस्वर सबका एक ही था, देशभक्ति का और उन्होंने स्वरचित कविता की दो पंक्तियों से समापन किया,
‘ यदि जन्म जन्मांतर सच है तो हे प्रभु यह वर देना ।
देना जन्म इसी धरती पर,शाप प्रवास का हर लेना ।‘
प्रस्तुति -आशा बर्मन
इस कार्यक्रम का वीडियो देखने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें: Click here

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