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होली महोत्सव
2014

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हिन्दी राइटर्स गिल्ड का होली महोत्सव 2014

हिन्दी राइटर्स गिल्ड का वैष्णों देवी मंदिर ओकविल के सहयोग से होली महोत्सव
२२ मार्च, २०१४ – इस वर्ष वैष्णो देवी मन्दिर, ओकविल ने कैनेडा की हिन्दी साहित्य की मानक संस्था हिन्दी राइटर्स गिल्ड को होली महोत्सव अपने सभागार में मनाने के लिए आमंत्रित किया जिसे गिल्ड ने सहर्ष स्वीकार किया।
इस वर्ष के कार्यक्रम की दो विशेषताएँ थीं – पहली कि कार्यक्रम में केवल बच्चों की प्रस्तुतियाँ थीं जिनमें बॉलीवुड के प्रभाव से दूर रहने का प्रयास झलक रहा था और दूसरा यह कि पहली बार कैनेडा की किसी हिन्दी की साहित्यिक संस्था ने अपने कार्यक्रम द्वारा स्थानीय समाज सेवक संस्था की सहायता की। गिल्ड ने अतिथियों से अनुरोध किया था कि चाहे कार्यक्रम निशुल्क है परन्तु "पील चिल्ड्रन एसोसिएशन फाउंडेशन" के पाँच साल की आयु के बच्चों के लिए कपड़े और डायपर भेंट करें; जिसकी फाउंडेशन को आवश्यकता रहती है और लोगों ने दिल खोल कर सहायता की।
कार्यक्रम का आरम्भ सदा की तरह गुलाल अबीर से हुआ। गिल्ड के सदस्यों ने अतिथियों रंगों से स्वागत किया जिसका बच्चों और बड़ों बहुत आनन्द उठाया। समयानुसार दोपहर के १२:३० बजे मंदिर द्वारा भोज परोस दिया गया। स्वादिष्ट व्यंजनों का आनन्द उठाने के बाद लगभग १ बजे सांस्कृतिक कार्यक्रम आरम्भ हुआ।
सांस्कृतिक कार्यक्रम का आरम्भ करते हुए डॉ. शैलजा सक्सेना ने मंदिर का धन्यवाद किया और मंदिर के अध्यक्ष श्री हरि गोयल को मंच पर आमंत्रित किया। उन्होंने लोगों की भीड़ और होली का जोश देखते हुए कहा कि भविष्य में भी मंदिर होली कार्यक्रम गिल्ड के सहयोग से ही करना चाहेगा।
कार्यक्रम के संचालक थे विद्याभूषण धर और पूनम जैन कासलीवाल। दोनों ने अतिथियों का स्वागत करते हुए हिन्दी और इंग्लिश में (बच्चों के लिए) होली का महत्व बताया और भारत की होली की याद ताज़ा करवायी। सांस्कृतिक कार्यक्रम नन्ही अनिका बिरला द्वारा सरस्वती वंदना गायन से प्रारंभ किया गया। इसके बाद मंदिर के संगीत शिक्षा कार्यक्रम की शिष्या नीति धिमान ने भजन गाया और तबले पर संगत अन्य शिष्य अक्षय धिमान ने की। अदिति ने हिन्दी कविता सुनाई। अनुजा पुरोहित ने अंग्रेज़ी की अपनी दो कविताएँ पढ़ीं। प्रसन्ना अरविंद और त्रिलोचन अरविंद (नाद आश्रम, गुरु कार्तिक रामालिंगम) ने सैक्साफोन और कीबोर्ड पर शास्त्रीय धुनों का वादन किया। उमंग सक्सेना की बांसुरी की दो धुनों ने सभागार में कान्हा की गूँज तरंगित की। सुखमीत सिंह ने पंजाब घराना शैली (गुरु उन्हीं के पिता) में तबला वादन किया। इसके बाद प्रसिद्ध शास्त्रीय संगीत गायिका रमणीक सिंह के शिष्यों लामिया सईद (होरी), मल्हार सिंह (तबला) और रागिनी सिंह (दादरा – नंद खेलत) प्रस्तुत किया जिसकी तबले पर संगत सुखमीत सिंह ने की। इसके पश्चात रस अकेडमी के पाँच बच्चों ने मीरा के भजन और होली गाई। इन्हें स्वर देने वाली थीं प्राची, मृणाल और अननिता और तबले पर संगत करने वाले थे दिनेश प्रसाद और स्टीव महादेव। कृष्णा भट्ट ने गरबा नृत्य प्रस्तुत किया। आदित्य और गौतम की कविताओं के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम समाप्त हुआ।
सांस्कृतिक कार्यक्रम के चलते दूसरी ओर बच्चों की चित्रकारी प्रतियोगिता की संचालन लेखिका और चित्रकार मीना चोपड़ा कर रहीं थीं। अंत में प्रतियोगिता विजेताओं और सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लेने वालों को प्रमाण पत्र और भेंट के साथ सम्मानित किया गया

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