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अंधा युग

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‘अंधा युग’ का सफल मंचन

पोर्ट क्रेडिट मिसिसागा 9 अक्टूबर, 2011 : पोर्ट क्रेडिट सैकण्डरी स्कूल में 'हिन्दी राइटर्स गिल्ड' के तत्वावधान में 'दैनिक जीवन में साहित्य' की संगीतमयी यात्रा, लोकगीत और काव्य नाटक द्वारा की गई। कार्यक्रम का संचालन श्री सुमन घई के कुशल नेतृत्व में हुआ। सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ मानोशी चटर्जी की सुरीली आवाज़ में सरस्वती वंदना से हुआ। ऋषिका द्वारा लय में मनोरम भरतनाट्यम की प्रस्तुति के बाद डॉ. शैलजा सक्सेना ने उत्साहपूर्ण सरल शब्दावली में हिन्दी भाषा के इतिहास के आदिकाल, भक्तिकाल, रीतिकाल और आधुनिककाल का परिचय दिया। कार्यक्रम की विशेषता यह थी कि हिन्दी भाषा के इतिहास के चारों कालों से एक-एक प्रमुख रचना का मधुर गान मानोशी चटर्जी ने किया। गीतों का आनंद सभी श्रोतागण लेते दिखाई दिए। प्रसिद्ध 'गरबा' के सामूहिक नृत्य से सांस्कृतिक संध्या में और निखार आ गया । लोक गीत तो संस्कृति की जान होते हैं। कार्यक्रम में रोचक लोकगीत सुनकर अपने अंचल की यादें ताज़ा हो गईं। पूरे भारत की छटा बिखेरता हुआ कार्यक्रम आगे बढ़ा।
मिसिसागा की मेयर आदरणीया हेज़ल मैक्कैलियन कार्यक्रम आरम्भ होने से पहले ही हिन्दी राइटर्स गिल्ड को प्रोत्साहित करने के लिए आईं। कार्यक्रम में सांसद माननीय श्री नवदीप सिंह बैंस ने अपनी उपस्थिति से सभा का मान बढ़ाया उन्होंने सबको हिन्दी भाषा को लोकप्रिय बनाने और बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया और इस दिशा में 'हिन्दी राइटर्स गिल्ड' की प्रगति की सराहना की। साथ ही उन्होंने अपने कर कमलों से श्री प्राण किरतानी जी के सुगम संगीत की सी. डी. "भोर" का भी लोकार्पण किया।
सांस्कृतिक संध्या की सफलता की चरम परिणति धर्मवीर भारती के प्रसिद्ध काव्य नाटक 'अंधा युग' के सफल मंचन से हुई। भारतीजी का 'अंधा युग' महाभारत के युद्ध के अठारहवें या अंतिम दिवस की कथा है जब पूरा नगर महायुद्ध की त्रासदी से अभिशप्त हो जल रहा है गिद्ध नर कंकालों पर ऐसे मंडरा रहे हैं मानो अंधे युग की परछाई धरती पर छा रही हो। संजय से सब हाल सुनकर कौरव पक्ष अपने संबधियों की मृत्यु से तप्त और दुखी हैं। यहां तक कि माता गांधारी ने भी बदले की आग में जल रहे अश्वत्थामा द्वारा ब्रह्मास्त्र चलाने पर उसे नहीं कोसा अपितु इस युद्ध के लिए कृष्ण को ही दोषी ठहराया और पुत्र वियोग में त्रस्त हो कृष्ण को शाप दे दिया। युद्ध में पांडवों की जीत के रूप में सच्चाई की जीत को प्रतिध्वनित किया है। कृष्ण के अंत से द्वापर युग के अंत और अंधे युग या आधुनिक युग का प्रारंभ होता है। कृष्ण इस नाटक के केन्द्र हैं जो सार रूप में बताते हैं कि बुरे से बुरे वक्त में भी शुद्धता, नीति और सच्चाई का रास्ता मनुष्य के पास है, जो हमें चेताते हैं तथा सर्वनाश से पहले सच और न्याय पर चलने के कई मौके देते हैं। इस दृष्टि से 'अंधा युग' आधुनिक युग का प्रमुख शक्तिशाली नाटक है जो हमें राजनीति में हिंसा, द्वेष, स्वार्थ और पद लिप्सा की लड़ाई के पर्याय रूप ढूंढने और सर्वनाश से बचने के उपाय समझाता है।
जिन्होंने नाटक के प्रमुख पात्रों का अभिनय किया, वे हैं: प्रहरी: विकास सक्सेना महेन्द्र भंडारी, विदुर: विजय विक्रांत, कृतवर्मा: पाराशर गौड़, कृपाचार्य: सरन घई, संजय: नवीन पांडे, धृतराष्ट्र: सुरेश पांडे, गांधारी: डॉ. शैलजा सक्सेना, अश्वत्थामा: विद्याभूषण धर, नैपथ्य स्वर: व्यास: अटल पांडे, कृष्ण: सरन घई, गायन: भुवनेश्वरी पांडे, इन्दिरा वर्मा और लता पांडे, संगीतकार: प्राण किरतानी, संगीतबद्ध: सचिन शर्मा, प्रोडक्शन: विजय विक्रांत, निर्देशन: डॉ. शैलजा सक्सेना, परामर्श: सरन घई।
सभी पात्रों ने अपनी अभिनय प्रतिभा का अच्छा परिचय दिया या यूं कहें कि भारतीजी के 'अंधा युग' नाटक के साथ न्याय किया है क्योंकि इतनी बड़ी व गंभीर रचना के अभिनय का मंचन करना महत्वपूर्ण बात है। संवाद ओजपूर्ण एवं स्पष्ट थे, वेशभूषा एवं वातावरण नाटक के अनुरूप थे। मुख्य बात है कि अपने व्यावसायिक व अन्य ज़रूरी कार्यों के बीच अपनी रुचि को परिष्कृत करने और साधन की सीमा होते हुए भी लोगों तक ज्ञान नीति के तथ्य सुगमता से पहुँचाने के लिए समय निकाल पाना सराहनीय है। अंत में सबने स्वादिष्ट जलपान का मिलजुलकर आनंद लिया और इस सांस्कृतिक संध्या का समापन हुआ।
'अंधा युग' के गंभीर विषय को सरलता से लोगों तक पहुँचाने के लिए 'हिन्दी राइटर्स गिल्ड' के संस्थापक श्री विजय विक्रांत, श्री सुमन घई तथा डॉ. शैलजा सक्सेना को बधाई। हिन्दी राइटर्स गिल्ड का मुख्य उद्देश्य आम जनता को हिन्दी साहित्य से परिचित कराना है। वर्कशॉप द्वारा लोगों को इन्टरनेट और हिन्दी भाषा का कम्प्युटर ज्ञान कराने के साथ ही हिन्दी में लिखने के लिए प्रेरित करना तथा प्रिटिंग के लिए मार्गदर्शन देना है। आशा है कि 'हिन्दी राइटर्स गिल्ड' इसी तरह भविष्य में भी पूरे जोश से हिन्दी भाषा को प्रशस्त करने की दिशा में अग्रसर रहेगी।

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