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सफ़र

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कवि श्री पंकज जी द्वारा रचित “सफ़र” पर चर्चा

9 मई 2015 की मासिक गोष्ठी का आयोजन दो सत्रों में किया गया। पहले सत्र में श्री पंकज शर्मा ‘होशियारपुरी’ जी की काव्यपुस्तक “सफ़र” पर चर्चा की गई। मंच का संचालन श्री सुमन घई जी ने किया ।
पुस्तक पर चर्चा श्री निर्मल सिद्धू जी, श्री विजय विक्रांत जी, श्रीमती शैलेजा सक्सेना तथा श्रीमती आशा बर्मन द्वारा की गई। सभी ने संकलन को रोमांस तथा रहस्य से भरपूर माना। कवि के द्वारा अपने व्यक्तिगत अनुभवों को खूबी से नज़्मों की शक्ल मेँ पिरोया गया है। कवि की उर्दू, हिन्दी और पंजाबी पर एक सी पकड़ है जो कबीले तारीफ है ।
चर्चा के दौरान श्री घई जी, कवि श्री पंकज जी द्वारा रचित पंजाबी कविताएं सुनते रहे तथा बीच - बीच में कवि श्री पंकज जी के कविता पाठ ने समां बांध दिया ।
अल्पाहार के बाद दूसरा सत्र आरंभ हुआ, जिसका मंच संचालन श्री निर्मल सिद्धू जी ने किया। अगले दिन मातृ दिवस होने के कारण अधिकतर कवियों ने “माँ” पर स्वयं रचित कविताएं सुनाईं। माहौल भावुक और अश्रुपूर्ण हो गया। सभी अपने बचपन और अपनी माँ के अंचल तले जा बैठे। जिन रचनाकारों ने अपनी रचनाएं सुनायीं, उनके नाम हैं, श्रीमती स्नेह सिंघवी, श्रीमती पूनम चंद्रा मनु, श्री सुमन घई, श्रीमती पूनम कासलीवाल, श्री मकसूद चौधरी, श्री पंकज शर्मा, श्रीमती कैलाश महंत, श्रीमती शैलेजा सक्सेना, श्री राज महेश्वरी, श्रीमती आशा बर्मन, श्री संदीप कुमार, श्रीमती प्रमिला भारद्वाज, श्री जगमओहन सांघा, श्री राजीव पुंज, श्रीमती पूर्णिमा मोहन, श्री निर्मल सिद्धू। श्री इकबाल जी ने कैफी आज़मी द्वारा लिखित गीत ‘माँ है मोहब्बत का नाम, माँ को हजारों सलाम’ अपनी दिलकश आवाज़ मे सुना कर समां बांध दिया।

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