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इन राहों पे

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भुवनेश्वरी पांडेय जी की दो पुस्तकों के लोकार्पण समारोह की रिपोर्ट

हिन्दी राइटर्स गिल्ड कनाडा द्वारा आयोजित भुवनेश्वरी पांडेय जी की दो पुस्तकों — “इन राहों पे” तथा “छोटी-छोटी बातें” —का लोकार्पण समारोह स्प्रिंगडेल ब्रांच लाइब्रेरी, ब्रैम्पटन में अत्यंत गरिमामय, साहित्यिक एवं आध्यात्मिक वातावरण में सम्पन्न हुआ। यह आयोजन केवल एक औपचारिक पुस्तक-लोकार्पण नहीं, बल्कि शब्द, संवेदना और प्रवासी भारतीय सांस्कृतिक चेतना का एक सुंदर उत्सव बन गया।
कार्यक्रम का आरम्भ निर्धारित समयानुसार सौहार्दपूर्ण जलपान से हुआ, जिसकी सुन्दर व्यवस्था स्वयं लेखिका भुवनेश्वरी जी ने की थी। इस अनौपचारिक मिलन ने उपस्थित साहित्यप्रेमियों, अतिथियों और सदस्यों के मध्य आत्मीय संवाद का वातावरण निर्मित किया। जलपान के उपरांत औपचारिक कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
स्वागत भाषण हिन्दी राईटर्स गिल्ड की वरिष्ठ निदेशिका श्रीमती कृष्णा वर्मा जी ने प्रस्तुत किया। उन्होंने मुख्य अतिथि दीपिका डामरेला जी का हार्दिक स्वागत किया जो कि कनाडा के सार्वजनिक जीवन की एक प्रतिष्ठित हस्ती हैं। वे मिसिसॉगा सिटी काउंसिल में वार्ड 7 का प्रतिनिधित्व कर रही हैं और इससे पूर्व ओंटारियो विधान सभा की सदस्य रह चुकी हैं।
उन्होंने ‘मिनिस्टर ऑफ सीनियर्स अफेयर्स’ के रूप में भी महत्वपूर्ण दायित्व निभाया है। उन्होंने सभी ISCON से पधारे अतिथियों और उपस्थित साहित्यप्रेमियों का हार्दिक स्वागत किया।
तत्पश्चात कृष्णा जी ने कार्यक्रम के संचालन के लिये गिल्ड के निदेशक योगेश ममगाईं जी को आमंत्रित किया ।
योगेश ममगाईं ने अत्यंत सधे, संयत और साहित्यिक अंदाज़ में एक बार पुनः गिल्ड की तरफ़ से सभी का अभिनंदन किया। उनके प्रभावी सूत्र संचालन ने पूरे समारोह को सुव्यवस्थित, प्रवाहमय और सुरुचिपूर्ण बनाए रखा।
इसके पश्चात सुश्री मानौशी चटर्जी द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना ने वातावरण को भक्तिभाव, शांति और सांस्कृतिक गरिमा से ओत-प्रोत कर दिया।
मुख्य अतिथि श्रीमती दीपिका डामरेला जी तथा हिन्दी राइटर्स गिल्ड कनाडा की वरिष्ठ निदेशिका आशा बर्मन जी के करकमलों से पुस्तकों का विधिवत लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर लेखिका के पारिवारिक सदस्य तथा गिल्ड के सभी निदेशक मंडल उपस्थित रहे।
आशा बर्मन जी ने भुवनेश्वरी जी से जुड़ी अपनी स्मृतियों को साझा करते हुए उनकी रचनाधर्मिता, सरलता और विनम्र व्यक्तित्व का उल्लेख किया। मुख्य अतिथि दीपिका डामरेला जी ने अपने संबोधन में लेखन को जीवनानुभवों की सजीव अभिव्यक्ति बताते हुए भुवनेश्वरी जी की रचनाशीलता की सराहना की तथा हिन्दी भाषा और भारतीय संस्कृति के संवर्धन हेतु गिल्ड के प्रयासों को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
इसके बाद मंच संचालक द्वारा भुवनेश्वरी पांडेय जी का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत किया गया और उन्हें अपने विचार व्यक्त करने हेतु आमंत्रित किया गया। उन्होंने अत्यंत विनम्रता के साथ अपनी जीवन-यात्रा, लेखन की प्रेरणाओं तथा संवेदनात्मक अनुभवों को साझा किया। उनके शब्दों में जीवन की सादगी, आध्यात्मिक अनुभवों की ऊष्मा और हिन्दी के प्रति समर्पण स्पष्ट झलकता था। संचालक द्वारा श्रोताओं को पुस्तकों के अध्ययन एवं क्रय के लिए भी प्रेरित किया गया। कार्यक्रम की अगली कड़ी में गिल्ड की तकनीकी निदेशिका पूनम चंद्रा मनु जी ने हिंदी राईटर्स गिल्ड की संस्थापक निदेशिका डॉ. शैलजा सक्सेना जी द्वारा पुस्तक पर लिखी भूमिका पढ़कर सुनाई तथा उनका ऑडियो संदेश भी साझा किया, जिससे उनकी दूरस्थ उपस्थिति भी भावनात्मक रूप से समारोह से जुड़ गई।
इस्कॉन से पधारे आदरणीय श्री रवि सिंह जी (रूपानुगा दास) ने पुस्तकों को आध्यात्मिक संवेदना, जीवन-दर्शन और मानवीय मूल्यों से अनुप्राणित रचनाएँ बताते हुए उनकी रचनाओं पर अपने विचार व्यक्त किए।
पुस्तक समीक्षा एवं चर्चा का क्रम अत्यंत समृद्ध और विचारोत्तेजक रहा। आशा बर्मन ,कृष्णा वर्मा , राकेश मिश्रा ,लता पांडे तथा संदीप सिंह ने अपनी समीक्षाओं में कृतियों की भाषा, भाव-संवेदना, जीवन की सूक्ष्मताओं और सहज अभिव्यक्ति पर प्रकाश डाला। सभी वक्ताओं ने इस बात पर विशेष बल दिया कि भुवनेश्वरी जी का लेखन पाठक को अपने ही अनुभवों से जोड़ने की क्षमता रखता है। भुवनेश्वरी जी की बेटी प्राची पांडेय ने भावुक होकर अपनी माँ के पारिवारिक व लेखकीय संघर्षों को सबके समक्ष रखा । इसके उपरांत मानौशी चटर्जी जी ने अपने एक आगामी कार्यक्रम से सभी को अवगत कराया । गिल्ड के एक और निदेशक विद्या भूषण धर जी ने भुवनेश्वरी जी के प्रति अपना आभार व्यक्त करते हुए अपने विचार व्यक्त किए व सभी का आभार जताया । तत्पश्चात् योग गुरु एवं साहित्यकार संदीप त्यागी जी ने भुवनेश्वरी जी के साहित्यिक, व्यक्तिगत, सामाजिक और धार्मिक जीवन से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। प्रसिद्ध लेखिका सरस दरबारी जी तथा कार्यक्रम में उपस्थित श्रोता राकेश मिश्रा जी ने भी अपने विचार व्यक्त कर लेखिका के प्रति अपना सम्मान प्रकट किया । समारोह के अंत में हिंदी राईटर्स गिल्ड के वरिष्ठ निदेशक डॉ. नरेंद्र ग्रोवर जी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए मुख्य अतिथि, लेखिका, सभी वक्ताओं, आयोजकों, सहयोगियों तथा उपस्थित जनसमुदाय के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की और साथ ही अपने चिरपरिचित अंदाज़ में कार्यक्रम के अंतिम पड़ाव को ख़ुशनुमा बना दिया ।
इस प्रकार यह आयोजन केवल पुस्तक-लोकार्पण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि हिन्दी भाषा, साहित्यिक संवाद, सांस्कृतिक एकात्मता और प्रवासी भारतीय संवेदना का एक जीवंत उत्सव बन गया। कार्यक्रम ने यह सिद्ध किया कि जब शब्द अनुभव से जुड़ते हैं, तो वे भौगोलिक सीमाओं से परे जाकर समुदाय को एक सूत्र में बाँध देते हैं।
(रिपोर्ट -योगेश ममगाईं )

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