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विभिन्न भारतीय भाषाओं का कवि सम्मलेन

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विभिन्न भारतीय भाषाओं का कवि सम्मलेन

हिन्दी राइटर्स गिल्ड का वार्षिक कवि सम्मेलन अप्रैल 11, 2015 को ब्रैम्पटन लायब्रेरी के बेसमेंट सभागार में सफलता पूर्वक सम्पन्न हुआ। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आचार्य डॉ. यार्लागड्डा लक्ष्मी प्रसाद थे। जलपान की व्यवस्था कार्यक्रम से पहले थी। स्वादिष्ट इडली-साँभर, जलेबी तथा चाय के जलपान के साथ मित्र सदस्यों के कहकहे सभागार में गूँजते रहे।
जलपान के बाद कार्यक्रम का प्रारंभ श्रीमति आशा बर्मन,श्री भगवत शरण श्रीवास्तव, श्री राज माहेश्वरी, श्री अरुण बर्मन के द्वारा सरस्वती वंदना से प्रारंभ हुआ। इसके बाद डॉ. शैलजा सक्सेना ने आचार्य यार्लागड्डा लक्ष्मी प्रसाद का स्वागत करते हुये उनका परिचय दिया और कार्यक्रम की संयोजिका श्रीमति लता पांडेय ने उन्हें फूल दिये।
आचार्य यार्लागड्डा हिन्दी और तेलगू के धनी मनीषी साहित्यकार हैं। उन्होंने दोनों ही भाषाओं में शोधकार्य, आलेख, आलोचना और अनुवाद करके भाषाओं के मध्य सेतु का काम किया है। वे पद्मश्री की उपाधि से विभूषित किये जा चुके हैं। वे १९९६ से २००२ तक राज्यसभा के सदस्य रहे हैं , इसके साथ ही केंद्रीय हिन्दी समिति के सदस्य, संसदीय राजभाषा समिति के उपाध्यक्ष, आंध्र प्रदेश हिन्दी अकादमी के अध्यक्ष रहे हैं और पिछले पाँच वर्षों से "जनशिक्षण संस्थान(मानव संसाधन विकास मंत्रालय, नई दिल्ली)की विशाखापट्टनम शाखा के अध्यक्ष के रूप में कई शैक्षिणिक, सामाजिक, एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सफलतापूर्वक संचालन कर रहें हैं। उनकी लिखित और अनूदित पुस्तकों की सूची बहुत लंबी है। उन्हें भीष्म साहनी द्वारा रचित "तमस" के तेलगू अनुवाद पर साहित्य अकाद्मी पुरस्कार भी मिला है।
आचार्य यार्लागड्डा ने सभा में हिन्दी के प्रति प्रेम व्यक्त करते हुए कहा कि यह लोगों की भ्रांति है कि दक्षिण भारतीय लोग हिन्दी से प्रेम नहीं करते, हिन्दी के लेखकों को दक्षिण आकर हिन्दी के विकास और प्रचार के कामों को स्वयं देखना चाहिये। उन्होंने सभा में उपस्थित लोगों को दक्षिण भारत आने का निमंत्रण दिया और कहा कि मैं स्वयं आप को वहाँ के विश्वविद्यालयों में ले जाकर हिन्दी के कामों से परिचित करवाउँगा।उन्होंने कविता के अनेक उदाहरण देते हुए बताया कि ये कवितायें दक्षिण के कवियों की लिखी हुई हैं जो उत्तरभारत के किसी प्रतिष्ठित कवि की पंक्तियों से कम नहीं लगतीं। उन्होंने आह्वान किया कि उत्तर और दक्षिण के बीच हिन्दी का यह भेदभाव जब तक हम समाप्त नहीं करेंगे तब तक हिन्दी को न तो सही अर्थों में हम राष्ट्रभाषा का स्थान दे पायेंगे और न ही उसे विश्व भाषा बना पायेंगे।
इसके बाद डॉ. शैलजा सक्सेना ने श्रीमति लता पांडेय का परिचय देते हुये उनसे कार्यक्रम के संचालन का अनुरोध किया। लता पांडेय टोरोंटो की प्रतिष्ठित कवियत्री हैं और अपनी संश्लिष्ट और भाव-प्रवण रचनाओं से सबका मन बाँध लेती हैं। कार्यक्रम का प्रारंभ हिरागि के अग्रज सदस्य श्री भगवत शरण श्रीवास्तव जी के दो गीतों से हुआ जो अत्यंत मार्मिक थे। श्रीवास्तव जी की पत्नी श्रीमति सावित्री श्रीवास्तव और हिरागि के अन्य अग्रज सदस्य, और सावित्री जी के भाई, श्री प्रभु श्रीवास्तव जी के हाल ही में हुये निधन पर दो मिनट का मौन रख कर दिवंगत आत्माओं की शांति के लिये प्रार्थना की गई। सावित्री जी और प्रभु जी हिरागि के सक्रिय सदस्य थे और अपने स्नेहिल व्यक्तित्व के कारण सब के प्रिय थे। उनकी कमी हम लोग बहुत महसूस करेंगे।
इस कवि सम्मेलन के आयोजन को नया आयाम देते हुए लता जी ने इसमें बंगला, मराठी और काश्मीरी के कवियों को भी आमंत्रित किया था। बंगाली के असित घोष, मराठी की रेखा जोशी और काश्मीरी के दीपक राज़दान ने अपनी कविताओं से सबका मन बाँध लिया। कविताओं में भावों के रंग और शिल्प का नवीन रूप सभी श्रोताओं को सुखद लगा। इस कवि सम्मेलन में जिन हिन्दी के कवियों ने भाग लिया, उन कवियों के नाम इस प्रकार हैं: भगवत शरण श्रीवास्तव, आशा बर्मन, इंदु रायज़ादा, पूनम जैन कासलीवाल, सुमन सिन्हा, राज माहेश्वरी, पंकज शर्मा, पंकज सिंह, विद्याभूषण धर, पूनम चंद्रा "मनु", लता पांडेय, श्यामा सिंह, पाराशर गौड, जगमोहन सांगा, शैलजा सक्सेना ! सभी कवितायें भाव और शिल्प में बहुत सुन्दर थीं। श्रोता मंत्रमुग्ध से बैठे रहे। कार्यक्रम की सफलता कवियों की कविताओं पर होने वाली वाह-वाह और श्रोताओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति से पता लग रही थी। हिन्दी राइटर्स गिल्ड की ओर से सभी उपस्थित श्रोताओं और कवियों का बहुत-बहुत धन्यवाद।

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