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डॉ.शंकरलाल पुरोहित

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“स्वतंत्रता दिवस” विशेष मासिक गोष्ठी और ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित डॉ.शंकरलाल पुरोहित जी का सम्मान

भुवनेश्वर राज्य के अग्रणी अनुवादक डा शंकरलाल पुरोहित को कनाडा के हिन्दी राइटर्स गिल्ड ने मानद सदस्यता से नवाजा है। कनाडा के टोरंटो में आयोजित समारोह में हिन्दी राइटर्स गिल्ड के संस्थापक सदस्य डॉ. विजय विक्रांत ने डॉ. पुरोहित को मानद सदस्यता से सम्मानित किया।
इस अवसर पर डॉ. पुरोहित ने कहा कि अनुवाद का कार्य बड़ा ही दायित्वपूर्ण है। अनुवादक मूल भाषा को यशोदा की तरह अपनाकर उसे कान्हा की तरह बनाता है, जो कंस का वध कर दे। उन्होंने कहा कि अनुवाद किसी तरह से भी नए सृजन से कम की विधा नहींहै। उन्होंने हिन्दी राइटर्स गिल्ड का धन्यवाद करते हुए कहा कि हिन्दी के विकास में संस्था ने सराहनीय कार्य किया है। हिन्दी राइटर्स गिल्ड ने भुवनश्वर के विश्व मुक्ति संस्थान के साथ फ्रेंच भाषा में अनुवाद के लिए एक करार किया है। इस अवसर पर विश्व मुक्ति के मानद सदस्य सासंद प्रसन्न पाटशाणी भी टोरोंटो में उपस्थित थे। हिन्दी राइटर्स गिल्ड द्वारा एक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें पूनम चन्दा ‘मनु’, सविता अग्रवाल, डॉ. इन्दु रायजादा, कृष्ण जी व विद्याधर सहित 20 कवियों ने कविता पाठ में हिस्सा लिया।
डॉ. शंकरलाल पुरोहित का परिचय
जन्म : 1940 में।
शिक्षा : एम.ए, पी-एच.डी.।
1968 में ओडि़शा के विभिन्न महाविद्यालयों में हिंदी अध्यापन (हिंदी टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज, भुवनेश्वर में कुछ साल प्राचार्य रहे) कर सन् 1998 में बी.जे.बी. कॉलेज से सेवा निवृत्त हुए।
ओडि़या से हिंदी में सौ के करीब प्रमुख कृतियाँ अनूदित।
तुलनात्मक साहित्य, नाटक आदि पर दस से अधिक शोधार्थी पी-एच.डी. एवं दो डी.लिट. की डिग्री प्राप्त। केंद्रीय हिंदी निदेशालय, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, केंद्रीय हिंदी संस्थान (गंगा शरणसिंह सम्मान), केंद्रीय साहित्य अकादेमी अनुवाद पुरस्कार, हिंदी राइटर्स गिल्ड कनाडा की मानद आजीवन सदस्यता, भारतीय अनुवाद परिषद् सम्मान आदि शताधिक सम्मान-पुरस्कार, सूरीनाम में आयोजित विश्व हिंदी सम्मेलन सुरीनाम में विश्व सम्मेलन सम्मान।
संप्रति : एफ-105 श्रीधर, बालाजी कॉम्प्लेक्स, झारपड़ा, भुवनेश्वर-751006 (ओडि़शा)।
डॉ. पुरोहित ने उड़िया साहित्य का अनुवाद कर उसे हिन्दी भाषी जनता के समक्ष रखा, अनेकों ग्रंथों में उनके अनुवाद और उड़िया भाषा और साहित्य तथा हिन्दी भाषा और साहित्य से संबंधित लेख प्रकाशित हो चुके हैं।डॉ. पुरोहित ने ही प्रतिभा राय जी के प्रसिद्द उपन्यास " द्रोपदी " का सुन्दर अनुवाद किया है जिस को अभी जानपीठ पुरस्कार प्राप्त हुआ है। इसके अतिरिक्त उन्होंने गोपीनाथ महांति जी के " माटी मटाल", सीताकांत महापात्र के " अष्टपदी" , हरप्रसाद दास के "देश" आदि पुस्तकों का अनुवाद किया है। उनकी मौलिक पुस्तकों में, "जय जगदीश हरे" (जगन्नाथ एवं संस्कृति),"लिंगराज की नगरी भुवनेश्वर" , पं. गोपबंधु और सिंहदेह" प्रसिद्द हैं।

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