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एक दोपहर साहित्यकार/प्रकाशक
डा. संजीव कुमार के नाम

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“एक दोपहर साहित्यकार/प्रकाशक डा. संजीव कुमार के नाम”

शनिवार 11 मई 2024 को हिन्दी राइटर्स गिल्ड कनाडा के तत्वावधान में कार्यक्रम “एक दोपहर साहित्यकार/प्रकाशक डा. संजीव कुमार के नाम” का आयोजन किया गया। पहला सत्र संजीव जी पर केंद्रित कहा जबकि दूसरा सत्र मातृत्व दिवस को समर्पित रहा। डा. संजीव कुमार “अनुस्वार” पत्रिका के मुख्य संपादक हैं और उन्होंने साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। वे एक प्रतिष्ठित लेखक, कवि, और साहित्यकार हैं।वे लेखक के साथ साथ प्रकाशक भी हैं।कार्यक्रम का प्रारम्भ,गिल्ड की संस्थापक सदस्या डा. शैलजा सक्सेना द्वारा डा. संजीव कुमार के स्वागत से हुआ । वरिष्ठ सदस्य विक्रांत जी व शैलजा जी द्वारा संजीव जी को शाल पहना कर सम्मानित किया गया। शैलजा जी ने संजीव जी व उनके द्वारा रचित साहित्यिक गतिविधियों की विस्तृत जानकारी से श्रोताओं को अवगत कराया । तत्पश्चात शैलजा जी ने डा. संजीव से प्रश्नोत्तरी सत्र में उनकी रचनाधर्मिता पर उनसे कुछ प्रश्न किये जिनका उत्तर संजीव जी ने विस्तार पूर्वक दिया। लेखक व प्रकाशक के बीच संबंधों को लेकर,उपस्थित कवियों व लेखकों द्वारा किये गए प्रश्नों पर विस्तार से सार्थक चर्चा हुई । सभी के अनुरोध पर संजीव जी ने अपनी कुछ कवितायें भी सुनाई जिन्हें खूब पसंद किया गया । पहले सत्र के अंत में डा. संजीव ने अपनी संस्था की ओर से डा. शैलजा की साहित्यिक उपलब्धियों पर उन्हें बीपी ए फाउंडेशन और इंडियानेट बुक्स की ओर से शाल व काली चरण मिश्र साहित्य भूषण सम्मान दिया।
दूसरे सत्र में कवि सम्मेलन को संचालित करने के लिये शैलजा जी ने योगेश ममगाईं को आमंत्रित किया। सर्वप्रथम डा. जगमोहन सांगा ने अपनी ग़ज़ल पढ़ी जिसे खूब सराहा गया । कुलदीप अहलुवालिया ने माँ पर एक भावपूर्ण कविता पढ़ कर वाहवाही लूटी। “ज़िन्दगी ही लुटा दी जिसके लिये, वोही माँगे हिसाब तो क्या” जैसे शेर लिखने वाली मानौशी चटर्जी ने इस गजल को अपनी मीठी आवाज़ देकर माहौल को सुरमई बना दिया । अजय गुप्ता जी ने मोबाइल और उसके प्रभाव पर एक व्यंग्यात्मक रचना पढ़ी। आचार्य संदीप त्यागी जी माँ की महता पर कहते हैं कि “होने को भगवान भी बड़ी कौन सी बात, माँ होना भगवान की भी पर नहीं बिसात “ ।पूनम कालसीवाल जी ने अपनी सुन्दर कविता से सबका मन मोह लिया ।सविता अग्रवाल जी ने भी माँ पर एक सुन्दर कविता “मैं तुम और मैं” पढ़ी। विजय विक्रांत जी ने अपना संस्मरण सुना कर सबको आनंदित किया । भुवनेश्वरी जी ने अहंकार पर चोट करती कविता से सभी को एक सुन्दर संदेश दिया। चूँकि डा. संजीव जी को वापस अमेरिका जाना था तो उन्होंने सबसे विदा ली । इसके उपरांत सभी कवि जलपान हेतु हाल के साथ बने कैफ़ेटेरिया में आये और फिर शेष कवियों ने वहीं अपनी कवितायें पढ़ी । जिनमें सतीश सेठी, आशा बर्मन , कृष्णा वर्मा, संदीप सिंह, प्रीति अग्रवाल, पीयूष श्रीवास्तव ,बंदिता सिन्हा, शैलजा सक्सेना व योगेश ममगाईं ने अपनी रचनायें पढ़ीं । कॉर्पोरेट सेक्टर की भव्य इमारत की सातवीं मंज़िल के हॉल में बैठ कर कवि सम्मेलन करने का कुछ अलग ही आनंद आ रहा था । जिसके लिये संदीप सिंह जी का जितना भी धन्यवाद किया जाये वो कम है ।
हाल से निकल कर जलपान के बाद कैफ़ेटेरिया में कवितायें पढ़ना किसी शीशमहल से कम नहीं लग रहा था । बन्दिता जी व प्रीति जी द्वारा लाये गये समोसों,टिक्की, गुलाब जामुन व ढोकले की ख़ुशबू से तो कैफ़ेटेरिया अभी भी महक रहा होगा। कामिनी जी द्वारा बिना बैठे घन्टों किया गया श्रम खूबसूरत तस्वीरों व चलचित्रों से झलक रहा है । शैलजा जी के निर्देशन में सम्पन्न हुई इस यादगार साहित्यिक गोष्ठी को सफल बनाने के लिये उनको व उनकी टीम को बहुत बहुत बधाई ???
रिपोर्ट
( योगेश ममगाईं)

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