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हिन्दी-संस्कृत-संस्कृति के
मधुर भाव की एक दोपहर

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हिन्दी-संस्कृत-संस्कृति के मधुर भाव की एक दोपहर

हिन्दी राइटर्स गिल्ड कैनेडा की मासिक गोष्ठियों का क्रम कोरोना के बाद लगातार जारी है। हर माह के तीसरे शनिवार दोपहर १:३० से ४:३० तक ब्रैम्पटन शहर की स्प्रिंगडेल लाइब्रेरी में हिन्दी प्रेमी और हिन्दी के लेखक समय निकाल कर मिलते हैं, अपनी रचनाएँ पढ़ने के साथ-साथ किसी एक प्रतिष्ठित लेखक, उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर भी बात करते हैं। इस क्रम में पं. भवानी प्रसाद मिश्र, श्री सुमित्रानंदन पंत पर बात करने के बाद कल बाबा नागार्जुन जी को याद किया गया।
इस माह के तीसरे शनिवार यानी जून 17 2023 की गोष्ठी में कुछ पुराने और कुछ नए सदस्यों के बीच एक सुखद रचनात्मक दोपहर बीती। उसी दिन शाम गिल्ड की सदस्या मानोशी चैटर्जी का संगीत का कार्यक्रम होने से कुछ सदस्य कम आए थे तो प्रारंभ में लगा कि आज आत्मीय गोष्ठी में बातचीत और देर तक सुनाने का क्रम होने वाला है पर फिर लोग आते गए और कारवाँ बनता गया। कुछ नए लोग और कुछ पहचाने चेहरे… पर कार्यक्रम में पहली बार आने वाले लोगों ने मन को मिलन की सुखद अनुभूति से भर दिया। नए में सुषमा जी, आकृति अग्रवाल जी, अंकित अग्रवाल जी, गुरप्रीत बटालवी जी और पहचाने चेहरों में पहली बार आने वाले संस्कृत भारती के प्रमुख और संस्कृत के प्रतिष्ठित प्राध्यापक हर्ष ठक्कर जी, उनकी पत्नी दिशा और भारत से आईं, हिन्दी/ संस्कृत प्राध्यापिका/ लेखिका और दिशा जी की माता जी, उषा हिरानी जी तथा बहुत समय बाद आने वालों में सुरेश पांडे जी, उनकी पत्नी माया जी और भारत में इतिहास के प्रोफ़ेसर माया जी के पिता जी थे। हमारे सदस्यों में नए जुड़े अनुज शर्मा जी मिठाई के कई डिब्बों के साथ-साथ सुन्दर कविता और गीत लाए थे, बंदिता सिन्हा जी और उनके पति अनिल जी ने बेटी के डॉक्टरी में एम.डी. सर्वोच्च अंकों से उत्तीर्ण करने की प्रसन्नता में घर में बनाए लिट्टी, चने, रसगुल्लों और चाय के साथ सबके बीच पर्व सी मिठास घोली और बंदिता जी ने अपनी विशिष्ट शैली में दो रचनाएँ सुनाईं। संस्था के वरिष्ठ संस्थापक निदेशक विक्रांत जी ने अपनी मौलिक रचना ’ख़ुदा के नाम चिठ्ठी’ और उस चिठ्ठी का जबाब सुनाया और नाइजीरिया के प्रवास का एक रोचक प्रसंग भी सुनाया। यहाँ सब को स्मरण कराते चलें कि जुलाई १५ को विक्रांत जी की ई-पुस्तक (प्रकाशक- www.pustakbazaar.com) “यादें ईरान की” का विमोचन है। संस्मरण की यह पुस्तक इस अर्थ में तो विशेष है ही कि ईरान पर इस तरह से लिखीं हिन्दी में बहुत पुस्तकें हमें नहीं मिलतीं पर इसके साथ ही यह इसलिए भी विशेष है कि संभवत: कैनेडा से प्रकाशित यह पहली संस्मरण पुस्तक है। इस गोष्ठी में श्रीमती कांता विक्रांत जी की उपस्थिति बहुत दिनों बाद हुई थी। नई सदस्या सुषमा जी ने एक बाल कविता सुनाई। पूनम चंद्रा ’मनु’ जी, निर्मल जसवाल राणा जी, डॉ. शैलजा सक्सेना, उषा हिरानी जी ने अपनी भावपूर्ण रचनाएँ सुनाईं। अनुज जी ने माँ पर रचना सुना कर मन नम कर दिया था तो मनु जी की माँ पर आधारित रचना ने सबको विह्वल कर दिया। शैलजा जी ने पिता पर लिखी रचना सुनाई। निर्मल जी ने प्रेम पर एक कविता पढ़ी। दूसरे दौर में निर्मल जी ने एक गीत सुनाया, अनुज जी ने प्रेम पर लिखा स्वरचित गीत मीठे स्वर में गा कर सुनाया, मनु जी ने पतंग पर और शैलजा जी ने बेटे पर और एक हास्य मुक्तक सुनाया। उषा हिरानी जी ने दो बहुत छोटी पर गहरी कविताएँ पहले दौर में सुनाईं तो दूसरे में उन्होंने एक वृद्धों की स्थिति पर एक लघुकथा सुनाई। हर्ष ठक्कर जी ने संस्कृत कथा की इतनी सुन्दर नाटकीय प्रस्तुति की कि सभी मंत्रमुग्ध हो उन्हें देखते/ सुनते रहे। संस्कृत भाषा का ऐसा सरल, सहज प्रयोग पहले कभी देखने को नहीं मिला था। इस पूरे कार्यक्रम को अपने आकर्षक, आत्मीय और सुन्दर तरह से संचालित करने वाले डॉ. नरेन्द्र ग्रोवर जी की रचनाएँ गहराई लिए हुए थीं और समाज पर कटाक्ष करने वालीं थीं। कार्यक्रम में नागार्जुन जी पर अपनी यादें साझा कीं डॉ. शैलजा सक्सेना ने। नए सदस्यों ने अपने परिचय दिए और सभी ने अगली बार अपनी या अपने प्रिय कवि की रचना लाने और साझा करने का निश्चय किया। कार्यक्रम का वातावरण हमेशा की तरह बहुत आत्मीय और सौहार्द्रपूर्ण था। इस संस्था के सभी कार्यक्रम नि:शुल्क होते हैं और यहाँ हर हिन्दी प्रेमी का स्वागत होता है। हिन्दी के संवर्धन, संरक्षण, प्रचार और प्रसार में यह संस्था पिछले १५ वर्षों से लगी हुई है। आइये, आप भी अपनी भाषा, साहित्य और संस्कृति की इस जय यात्रा में, महीने में एक सुखद-रचनात्मक दोपहर का, कुछ सुनने और कुछ सुना कर समृद्ध होने का आनंद लेने पधारिये।
रिपोर्ट
डॉ. शैलजा सक्सेना

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