काव्य संग्रह 'आईना' का लोकार्पण
19 अक्टूबर हिंदी राइटर्स गिल्ड कैनेडा के लिए विशेष दिन रहा। इस दिन की गोष्ठी में निदेशक मंडल के सदस्य और सक्रिय सदस्य डाo नरेन्द्र ग्रोवर जी के दूसरे काव्य संग्रह 'आईना' का लोकार्पण किया गया। हिंदी परिवार की इस उपलब्धि के लिए सभी बहुत उत्साहित थे।
पिछल माह, सितंबर में, काउंसलेट के सहयोग से 'हिन्दी दिवस' बहुत धूम धाम से मनाया गया था । समय के अभाव के कारण कई वक्ता उस दिन "हिन्दी कल, आज और कल' विषय पर बोलने से रह गए थे सो इस माह के कार्यक्रम का आरम्भ उन सब के वकतव्य से किया गया।
संचालन की बागडोर योगेश ममगईं जी के कुशल हाथों में रही जिन्होंने सभी को समय भी दिया और कार्यक्रम के समय का भी ध्यान रखा।
सर्वप्रथम योगेश पाण्डेय जी मंच पर पधारे । 'भाषा की कहानी ' पर उन्होंने एक अत्यन्त सुन्दर कविता सुनाई। हिंदी भाषा के इतिहास में आल्हा - ऊदल के समय में फलने , फूलने वाली हिंदी किस तरह अंग्रेजों के टोपी - सूट में दब कर रह गई, इसकी व्यथा कथा इस कविता में वर्णित थी ।
योगेश पाण्डेय जी ने हिन्दी को अधिक से अधिक प्रयोग में लाने की प्रतिज्ञा ली और सब को प्रेरित किया।
इसके पश्चात डा० बंदिता सिन्हा जी ने हिन्दी के महत्व और इतिहास को रेखांकित करते हुए ओजस्वी वकतव्य दिया कि यदि हम सब हिन्दी बोलेंगे तो हिन्दी केवल माथे की बिंदी ही नहीं, अपितु माथे का सिरमोर बनेगी ।
भुवनेश्वरी पाण्डेय जी ने कहा कि हिन्दी गानों के माध्यम से बच्चों के बीच हिन्दी के प्रति रुचि बनी हुई है इसलिए हिन्दी का भविष्य खतरे में नहीं है।
हिन्दी राइटर्स गिल्ड की संस्थापक , निदेशिका, डा० शैलजा सक्सेना जी ने अपने वकतव्य में 'भाषा ' की परिभाषा को विस्तार से समझाया । उन्होंने सचेत किया कि बोलने के साथ - साथ हिन्दी का पढ़ना व लिख पाना भी अत्यन्त आवश्यक है वरना हिन्दी केवल एक 'बोली ' बन ही रह जायेगी। इसलिये हिन्दी बोलने वाले बच्चों को ' कम से कम बोल तो रहे हैं ' कह कर हमें तसल्ली नहीं कर लेनी चाहिए बल्कि बच्चे अधिक से अधिक हिंदी लिखें, पढ़ें, इसका प्रयास करना चाहिए।
इसके बाद मध्यांतर हुआ जिसमें सब ने ग्रोवर साहब द्वारा लाए जलपान का आनन्द उठाया ।
मध्यान्तर के बाद -डा० नरेन्द्र ग्रोवर जी के काव्य संग्रह 'आईना' के लोकार्पण का कार्यक्रम प्रारम्भ हुआ।
डा ग्रोवर के लिए यह एक बहुत ही भावुक और महत्वपूर्ण क्षण था । उन्होंने अपने संग्रह के विषय में बताया कि उनके जीवन की अनुभूतियों का यह सच में आईना ही है । अपने उपनाम 'आनन्द मुसाफिर ' को सिद्ध करते हुए उनकी कविताएँ जीवन के हर उतार - चढ़ाव को सहर्ष स्वीकार करती हैं और एक दार्शनिक की तरह हर परिस्थिति से कुछ न कुछ सीखते चले जाने को प्रेरित करती हैं। जीवन के ये अनुभव और विचार ही इस संग्रह का केंद्र हैं।
ग्रोवर जी ने बताया कि हिंदी में लेखन की स्थितियाँ उर्वर हैं । उन्होंन हि .रा . गि के सभी साथियों को उनके प्रेम और प्रोत्साहन के लिए आभार व्यक्त करते हुए अपनी कुछ नई पंक्तियों से अपनी बात पूर्ण की -
कुछ बताई, कुछ छुपाई / तुम तो जानते हो सारी सच्चाई !
इसके बाद इस पुस्तक की समीक्षा के लिए कुछ लोगों को आमंत्रित किया गया। शैलजा सक्सेना जी जिन्होंने इस पुस्तक में भूमिका भी लिखी है, उन्होंने काव्य संग्रह की सराहना करते हुए कहा कि यह एक लंबे समय से देखे, भोगे हुए और समझे हुए जीवन का दस्तावेज़ है। जहाँ कवि ने जीवन - प्रिज़्म के अनेक रूपों से अपने पाठकों का साक्षात्कार करवाया है।
संस्था के सह - संस्थापक, निदेशक और वरिष्ठ साहित्यकार श्री विजय विक्रांत जी ने कई कविताओं का उदाहरण देते हुए ग्रोवर जी की रचनात्मकता के विस्तृत कलेवर की चर्चा की। उन्हें 'कील ' कविता सर्वाधिक पसन्द आई - "वक्त की तस्वीर के पीछे ज़िन्दगी का बोझ उठाती है । जिन्दगी के बाद भी जिंदगी चलती है। "
निदेशक मंडल के कुछ साथी कार्यक्रम में नहीं आ पाए थे पर उन्होंने अपने लिखित शुभकामना संदेश भेजे थे जिन्हें योगेश ममगाईं जी ने पढ़ा।
तकनीकी निदेशिका पूनम चंद्रा 'मनु' ने बधाई भेजते हुए लिखा था कि यह संग्रह केवल ग्रोवर जी का ही नहीं अपितु सारे हिन्दी राइटर्स गिल्ड का गौरव बढ़ाता है।
कृष्णा वर्मा जी ने बधाई संदेश में लिखा कि
डॉ. नरेन्द्र ग्रोवर जी के काव्य-संग्रह ’आईना’, प्रकृति और मानवीय संबंधों की सशक्त एवं मार्मिक अभिव्यक्ति का आईना है।
विद्याभूषण धर जी ने कहा,
डॉ. नरेंद्र ग्रोवर जी
की काव्य यात्रा और इस नए संग्रह की रचना ने साहित्य जगत को और समृद्ध किया है। "आईना" निश्चित रूप से समाज और जीवन के उन पहलुओं को दर्शाएगा जिन्हें अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है।
आशा बर्मन जी ने अपने बधाई संदेश में प्रशंसा करते हुए कहा कि
नरेंद्र ग्रोवरजी की पुस्तक 'आईना ' की विशेषता है कि इसमें बहुत गंभीर विषयों को बहुत सरल ढंग से अभिव्यक्त किया गया है ।
' हर शख्स मुसाफिर है, मुसाफिर से गिला कैसा , कुछ देर तो संग बैठा, संगदिल से गिला कैसा ' ग्रोवर जी की ये पक्तियाँ उन्हें विशेष पसन्द आईं।
प्रीति अग्रवाल जी ने दार्शनिकता , प्रकृति आदि पर लिखी कविताओं का उल्लेख किया । उनका मुक्तक , ''हाँ में हाँ आजकल मैं करता नहीं , राह कोई हो चलने से डरता नहीं , दोस्त मेरे आजकल कटने लगे हैं मुझसे , तय शुदा रास्तों पर आजकल चलता नहीं " उन्हें विशेष पसन्द आया।
डा० बंदिता सिन्हा जी को डॉ.ग्रोवर का व्यक्तित्व कविताओं में नारियल की तरह प्रतीत हुआ जिसे तोड़ने पर भीतर सहेजी हुई भावनाओं की नमी को पाठक देख और समझ सकता है।
डा० निर्मल जसवाल जी, जिन्होंने पुस्तक की भूमिका भी लिखी है, कहा कि लेखक को उसकी कृतियों द्वारा जाना जा सकता है। इनकी स्पष्टवादिता के सभी कायल है और वही तथ्य इनकी कविताओं में भी दिखता है ।
"व्याकरण में एक डैश भी होता है । जिंदगी में भी ऐसा डैश होता है ,जो जिन्दगी का सार संजोता है । " समाज का हर रंग इनकी कविताओं में है, जिनसे आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।
आत्मासिंह जी ने बधाई देते हुए कहा कि "जहाँ न पहुँचे रवि, वहाँ पहुँचे कवि।"
सुनील शर्माजी ने अपने वक्तव्य में कहा कि जब भी उन्हें लगता है कि हिन्दी साहित्य और उसके सौन्दर्य की कमी उन्हें खल रही है तो हिंदी राइटर्स गिल्ड कैनेडा की गोष्ठी में आकर वह कमी पूरी हो जाती है।
उन्होंने बधाई देते हुए कहा कि ग्रोवर जी का व्यक्तित्व बहुत प्रभावशाली है।
हि .रा . गि की प्रशंसा में उन्होंने कहा कि यहाँ अंग्रेजी का "हैंगओवर " नहीं है । मैं आता हूँ फकीर बनकर और जाता हूँ एक समृद्ध फकीर बनकर'।
अंत में डा० पाहवा जी ,जो निर्मल जसवाल जी के माध्यम से आई थी और दिल्ली वि .वि . में प्रोफेसर है ,उन्होंने कहा , "कहने को जब कोई दूसरा न मिला, सामने आईना रख खुद को सुन लिया । "
और घोषणा की कि वे अब हमेशा के लिए हि . रा . गि के साथ जुड गई हैं।
अंत में सबने ग्रोवर जी से अपनी - अपनी हस्ताक्षर की हुई प्रति प्राप्त की। इस प्रकार एक और सुन्दर उपलब्धि के साथ अक्टूबर साहित्यिक मिलन कार्यक्रम का समापन हुआ । डॉक्टर ग्रोवर को पुनः बहुत बधाई।