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मंगल भवन अमंगल हारी राम

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'मंगल भवन अमंगल हारी राम'

20 अप्रैल 2024 को लाइब्रेरी में आयोजित हिंदी राइटर्स गिल्ड की मासिक गोष्ठी का विशेष कार्यक्रम, हम सब के इष्ट, प्रभु राम पर आधारित था।
संचालन की बागडोर सम्भालते हुए डॉ. नरेंद्र ग्रोवर जी ने कहा कि जिस प्रकार हमारा माँ के प्रति जुड़ाव होता है, उसी प्रकार सभी भारत वासियों का श्री राम के प्रति भी जुड़ाव है।
सर्वप्रथम ,कुछ विशेष सूचनाएँ देने हेतु, उन्होनें शैलजा सक्सेना जी को आमंत्रित किया।
शैलजा जी ने बताया कि इस संस्था की स्थापना 2008 में हुई थी, और तभी से मासिक गोष्ठियाँ हो रही हैं और पिछले कुछ वर्षों में हम वैश्विक पटल पर विशेष तौर से सक्रिय रहे हैं।
संस्था ने अबतक 14 पुस्तकों का प्रकाशन किया है, जिनमें, गद्य संकलन, 'सम्भावनाओं की धरती' और पद्य संकलन, 'सपनों का आकाश' को विशेष सराहना मिली है।
केंद्रीय हिंदी संस्था, नागरा, ने इनकी 11 हज़ार प्रतियाँ छपवाई और पूरे भारत मे वितरण किया।
उन्होंने यह खुशखबरी भी सुनाई की ह.व.ग ने रविन्द्र नाथ टैगोर विश्विद्यालय, भोपाल , के साथ सम्बद्धता पर हस्ताक्षर किए हैं, और ऐसी ही सम्बद्धता का विमर्श, आगरा विश्विद्यालय के साथ भी चल रहा है।
आगे उन्होंने बताया कि रमेश पोखरियाल निशंक जी के नेतृत्व में एक 'लेखक ग्राम' का भी जल्द ही उद्घाटन होने वाला है।
कैनेडा के प्रमुख त्रैमासिक प्रकाशन 'हिंदी चेतना' और पैक्षिक ई प्रकाशन 'साहित्य कुञ्ज' के विषय मे बात करते हुए उन्होंने कहा कि हम सब को इन्हें पढ़कर और अपनी रचनाएँ भेजकर , इनसे साहित्यिक लाभ उठाना चाहिए।
नन्हे नव ने मंच पर सुप्रसिद्ध भजन, 'श्रीरामचंद्र कृपालु भज मन' का गायन किया, और अर्णव ने भी एक सुंदर कविता द्वारा सन्देश दिया कि राम ही सबका सार हैं और हमारे तारणहार हैं।
इंद्रा वर्मा जी ने अपने मधुर कन्ठ से मीरा के भजन, 'पायो जी मैंने राम रत्न धन पायो' का गायन किया। भुवनेश्वरी पाण्डेय जी ने रामचरितमानस की लोकप्रिय चौपाइयाँ 'भय प्रकट कृपाला दीनदयाला, कौशल्या हितकारी...' गायीं।
राज माहेश्वरी जी ने अपने आलेख द्वारा कहा कि श्री राम के अवतरित होने का उद्देश्य था धर्म की पुनर्स्थापना, जिसके लिए अधर्म का नाश करना अनिवार्य था।
राहुल शुक्ल जी ने राम- शबरी संवाद के माध्यम से कहा कि राम एक आदर्श स्थापित करने के उद्देश्य से जन्मे थे। युगों युगों तक सब याद रखेंगे कि भारत ऐसा एकमात्र देश है जहाँ एक वैभवशाली क्षत्रिय, और एक भीलनी ने मिलकर इतिहास रचा।
लता पाण्डेय जी ने उर्मिला के ऊँचे चरित्र और अदर्शों का विवेचन करते हुए कहा कि वे एक संवेदनशील, कर्तव्यपरायण, निश्चल, धैर्यवान तपस्विनी थी। उन्होंने यह आशा जताई कि भविष्य में ऐसे मूक परन्तु महत्वपूर्ण पात्रों की और अधिक चर्चा होगी।
प्रीति अग्रवाल जी ने माता शबरी की जन्मकथा सुनाई और श्री राम द्वारा दी गयी 'नवधा भक्ति' के प्रकारों से सब को अवगत कराया।
तद्पश्चात चाय नाश्ते के ग्रहण हेतु मध्यान्तर घोषित किया गया।
पूनम चन्द्रा 'मनु' ने अपनी सुंदर कृति 'कैकयी तुम कुमाता नहीं हो' से सब का मन जीत लिया। आशा बर्मन जी ने अपने कोकिल कंठ से एक अति सुंदर भजन गाया जिसमें राम का गुण गान था। सुषमा रानी जी ने अपने मधुर स्वर में एक राम भजन गाया, जिसके बोल थे, ' मेरी कुटिया के भाग खुल जाएंगे, राम आएंगे।'
कांसुलेट से, अपनी पत्नी अनसुइया जी के साथ आए, धीरज जी ने ह.व.ग की प्रशंसा में कहा कि हमारे सभी कार्यक्रम , मातृभाषा हिंदी को वैश्विक स्तर पर स्थान देने का एक बहुत सुंदर प्रयास होते हैं और वे भविष्य में भी हमारे कार्यक्रमों में यथासम्भव उपस्थित रहेंगे।
शैलजा सक्सेना जी ने अपने वक्तव्य में समझाया कि 'मंगल' वह होता है जो हमारे 'हित' में होता है। हमारी इच्छापूर्ति में हमारा मंगल निहित हो, यह अनिवार्य नहीं। ईश्वर वही होने देता है जिसमें हमारा कल्याण होता। उन्होंने आगे कहा कि जब हमारा मन गल जाता है अर्थात अहंकाररहित हो जाता है तभी हमारा मंगल सम्भव होता है।
कामिनी सिंह जी ने रामचरितमानस के विभिन स्त्री पात्रों का आदिपुरुष राम जी के साथ सम्बंध उद्बोधित करता सुंदर लेख पढ़ा।
अनुराधा जी ने एक सुंदर कविता द्वारा कहा कि मन के रावण का ह्रास करना अभी भी बाकी है और अति आवश्यक है।
कृष्णा जी ने अपने रचे हाइकु से सुसज्जित सुंदर लेख पढ़ा और राम महिमा का व्याख्यान किया। विक्रांत जी ने एक सुंदर कविता द्वारा राम का गुणगान किया जिसे सब ने बहुत सराहा। आ.काम्बोज जी ने बाली प्रसंग के माध्यम से बताया कि चौपाइयों को सही प्रकार से पढ़ना, उचित विश्लेषण करना और निष्कर्ष निकालना अत्यंत आवश्यक है, वरना उनका अर्थ पलट जाने की सम्भावना है। विद्या भूषण धर जी ने एक जोशीली कविता के माध्यम से बताया कि राम को सही मायने में जानना और उनका अनुसरण करना बहुत आवश्यक है।
अंत में सतीश सेठी जी ने अपने मधुर स्वर में राम भजन 'श्री राम चन्द्र कृपालु भज मन' गाया।
इस प्रकार 'जय श्री राम' के नारों के मध्य इस सुंदर कार्यक्रम का समापन हुआ।
रिपोर्ट-प्रीति अग्रवाल

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