hindiwg@gmail.com
side-design

मुक्त मंच

side-design
side-design

20 जुलाई 2024 को आयोजित काव्य गोष्ठी की विस्तृत रिपोर्ट

हिन्दी राइटर्स गिल्ड की जुलाई माह की काव्य गोष्ठी का आयोजन दिनांक 20/2/2024 को किया गया।
शैलजा सक्सेना जी ने भारत एवं दुबई से आए मेहमानों सहित सबका स्वागत किया। तथा अगामी माह अगस्त 17 को स्वतंत्रता दिवस पर किए जाने वाले कार्यक्रम की योजना की जानकारी देते हुए बताया कि कार्यक्रम में स्वाधीनता के गीत लिखने / गाने वाले लेखक/ लेखिकाओं के रूप धारण करके 3 से 4 मिनट में उनकी रचनाएँ प्रस्तुत करेंगे।
तत्पश्चात उन्होंने कार्यक्रम को गति देने के लिए संचालक पीयूष श्रीवास्तवा जी को आमंत्रित किया।
मुक्त मंच गोष्ठी में तेईस कवि-कवयित्रियों ने उत्साह पूर्वक भाग लिया। साहित्य की विविध विधाओं की एक साथ प्रस्तुति ने खूब प्रभावित किया।
पीयूष जी ने सर्वप्रथम दस वर्षीय रूही शर्मा को आमंत्रित किया। रूही शर्मा ने साहित्यकार रामेश्वर काम्बोज हिमांशु द्वारा लिखी बाल कविता ’भर-भर सागर देना’ से की। जिसमें नफ़रतों को छोड़कर सबको गले से लगाने का संदेश था।
गोष्ठी में उपस्थित भारत से आए स्थापित साहित्यकार रामेश्वर काम्बोज हिमांशु जी के विभिन्न रंगों और सुन्दर भावों से सुसज्जित दोहों की प्रस्तुति ने गोष्ठी में नया रंग भरा।
भुवनेश्वरी पांडे जी ने आत्म अवलोकन पर अपने विचार प्रस्तुत किए और "वो सावन के झूले" कविता सुनाकर बीते दिनों की यादें ताज़ा करा दीं।
इंदिरा वर्मा जी ने दो बहुत भावपूर्ण रचनाओं “आशीर्वाद” और “मैं हवा हूँ” का अनुपम पाठ किया।
आशा मिश्रा जी ने अपनी मधुर आवाज़ में एक गीत एवं अपनी सहेलियों को बेमिसाल बताते हुए सहज सरल शब्दों में एक कविता "मेरी सहेलियाँ” प्रस्तुत की।
योगेश पांडे जी ने अपनी रचना "कालचक्र" में जल और जीवन में समता को दर्शाया।
पूनम चंद्रा जी ने शीशे पर गिरती बारिश को बाँधकर दवात में भरेने का ख़ूबसूरत दृष्य बाँधा।
निर्मल जसवाल जी ने रचना ’फ़ितरत’ में हर दाल में काला बीन ही लेती हूँ और ’सुबह’ रचना में पत्तों पर लेटी धूप का ख़ूबसूरत वर्णन किया।
सिम्मी जी जो पहली बार गिल्ड की गोष्ठी में उपस्थित हुई थीं, माँ पर लिखे अपने भावों को साझा किया।
हरिंदर छाबड़ा जी ने अपनी कविता ’पैसे का स्वरूप’ में पैसे के महत्व पर बात की और ’पतझड़ का मौसम’ प्रकृति से जुड़ी कविता सुनाई।
योगेश मुमगाईं जी ने समाज की वस्तुस्थति के इर्द-गिर्द घूमती ग़ज़ल- उम्र भर जीते रहे बेटों की ख़ातिर, बेटियों को तरसता रहा बुढ़ापा। सुनाकर सबको भावुक कर दिया और "सृष्टि का विद्रोह" कविता के माध्यम से उन्होंने पर्यावरण पर गहरी चिंता जताई।
राकेश मिश्र जी जो सदा से गोष्ठी में एक बहुत अच्छे श्रोता रहे हैं आज पहली बार उन्होंने एक संस्मरण तथा अपनी एक छोटी सी लेकिन बहुत गहन रचना सुनाकर सबको हैरान कर दिया।
भारत से कनाडा घूमने आए सुधीर त्यागी जी ने गिल्ड की मुक्त मंच गोष्ठी में अपना संक्षिप्त परिचय देते हुए कुछ शेर सुनाए।
विशाखा जी भी पहली बार ही कार्यक्रम में जुड़ी थीं उन्होंने ”समय’ पर कविता सुनाई।
कृष्णा वर्मा जी ने व्यक्ति के अकेलेपन को व्यक्त करते हुए “तन्हाई” तथा डाकिए वाले दिनों को और नीले लिफ़ाफ़े के कमाल को याद करते हुए "वो नीला लिफ़ाफ़ा" अपनी दो कविताएँ साझी कीं।
दुबई से आईं मीनाक्षी धन्वंतरी जी ने अपना संक्षिप्त परिचय देते हुए गिल्ड की गोष्ठी में सम्मिलित होने पर अपनी खुशी वक्त की। "मेरे प्यारे काका" कविता में उन्होंने साँप और मनुष्य के स्वभाव में समानताओं को बताने का प्रयास किया तथा योग और प्रकृति पर आधारित अपनी दूसरी ख़ूबसूरत रचना प्रस्तुत की।
आत्मासिंह जी ने शिक्षा के प्रति जागरुकता पर एक रचना सुनाई "मम्मी मुझे जल्दी तैयार करो, मुझे स्कूल को जाना है"।
विद्या भूषण धर जी ने बचपन में भाई बहन के बीच की मीठी नोक-झोंक पर एक कविता साझी की "कभी कोई आया था मेरी ज़िंदगी में"। भावुक कविता पढ़ते-पढ़ते वह स्वयं इतने भावुक हो गए कि उनका गला भर आया।
हरीष पथरिया जी ने कविता "क्या नहीं है हमारे पास" में अपनी ओजपूर्ण आवाज़ में भारत का गुणगान किया और एक सुन्दर ग़ज़ल भी सुनाई "याद तुम्हारी आठों पहर का ख़ुमार है और कुछ भी नहीं।
वंदिता सिन्हा जी ने हास्यपूर्ण कविता "उसने कहा था जैसा चाहो वैसे रहना अपनी मर्ज़ी से रहना" सुनाकर माहौल को ख़ुशनुमा बना दिया।
सुषमा राय जी जो पहली बार ही गोष्ठी में सम्मिलित हुई थी, ने "पीले पत्ते और हमारे बुज़ुर्ग" कविता का पाठ किया जिसमें हमारे बुज़ुर्गों की ख़ुशियों का ख़्याल रखने की बात कही।
शैलजा सक्सेना जी ने कनाडा का दर्शनीय स्थल बैंफ की अद्भुत ख़ूबसूरती से प्रभावित होकर उसकी प्रकृतिक मनमोहक छटा का वर्णन अपनी कविता के माध्यम से किया। जिसने सभी श्रोताओं का मन मोह लिया।
अंत में शैलजा जी ने गोष्ठी के संचालक पीयूष श्रीवास्तवा जी को उनके कविता पाठ के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने अपनी शान्दार आवाज़ में "होता तो प्रेम ही है" रचना की बहुत सुंदर अभिव्यक्ति की।
सभी की रचनाए सुंदर संदेश देती हुई एक दूसरे को प्रेरित और प्रोत्साहित करती रहीं। काव्य गोष्ठी में गज़लों ने भी अपना सुंदर समा बाधा।
आज के जलपान की सारी व्यवस्था शैलजा सक्सेना जी की ओर से उनके जन्मदिन की खुशी में थी। हैप्पी बर्थडे गीत गाकर सभी ने उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएँ दीं तथा समोसे, बर्फ़ी, ढोकले संग गरमा-गरम चाय का जमकर आन्नद लिया।
पीयूष जी के बेहतरीन संचालन ने सभी को बांधे रखा। अन्त में सभी का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद कर गोष्ठी के समापन की घोषणा की।
योगेश मुमगाईं जी ने सभी की सुंदर तस्वीरें लेते हुए इस कार्यक्रम को यादगार बनाया।
इस सुंदर आयोजन के लिए आयोजक मंडल और सभी सहभागियों को बहुत-बहुत बधाई।
रिपोर्ताज
कृष्णा वर्मा

side-design
!Email Already Exist
We will never share your email with anyone else.