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पितृ दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कवि सम्मेलन

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एक शाम पिता के नाम

इस कार्यक्रम का वीडियो देखने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें: Click here
“ एक शाम पिता के नाम “ की रिपोर्ट
पितृ दिवस के उपलक्ष्य पर “हिन्दी राइटर्स गिल्ड “ कनाडा द्वारा Springdale Library Brampton में एक भावनात्मक और साहित्यिक वातावरण में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन का उद्देश्य पिताओं के प्रति सम्मान और श्रद्धा प्रकट करना था। कार्यक्रम में कनाडा के प्रसिद्ध कवियों ने भाग लिया और अपनी रचनाओं के माध्यम से पिता के जीवन, संघर्ष, और प्रेम को शब्दों में पिरोया। सभी ने अपने अपने अनुभवों व स्मृतियों के पिटारे से, “ एक शाम पिता के नाम” कार्यक्रम मे संस्मरणों की ऐसी वर्षा की, कि क्या कवि और क्या श्रोता , अपने ही अश्रुओं से भीगते चले गए । बच्चों के हृदय में जहाँ माँ का ममत्व उनमें प्रेम, दया, करुणा व क्षमा जैसे गुणों का संवर्धन करता है वहीं पिता की सख़्त सीखों भरी सोटी उनमें सांसारिक विषमताओं से जूझनें की क्षमता प्रदान करती है।
पिता के इस पार्श्व प्रेम के महत्त्व को हम तब और भी सूक्ष्मता से समझ पाते हैं जब हम स्वयं पिता की भूमिका निभा रहे होते हैं । बस कुछ ऐसी ही यादों ने सभागार में उपस्थित सभी को अपनी भावनाओं से भिगो कर रख दिया।
कार्यक्रम में संचालक की भूमिका निभाई गिल्ड के दो प्रतिभाशाली निर्देशक संदीप सिंह व डॉ नरेन्द्र कुमार ग्रोवर जी ने। प्रथम सत्र के मंच संचालन के लिये गिल्ड की निदेशिका व इस कार्यक्रम की समन्वयक कृष्णा वर्मा जी ने संदीप सिंह को आमंत्रित किया । संदीप जी कहा कि पिता पर जितना भी लिखा जाये कम होगा। ये ईश्वरीय आदेश है शायद जो हम पिताओं पर ये कवि सम्मेलन आयोजित कर रहे हैं । प्रथम वक्ता के रूप में भुवनेश्वरी पांडे जी ने अपने पिता के साथ जुड़ी यादों को साँझा किया । डा. निधि सक्सेना ने पिता पर एक लघु कथा पढ़ी । कहानी इतनी भावपूर्ण थी कि सभी के हृदय को छू कर आंसू बन कर बह गई । संचालक संदीप भी अपने हृदय में दबाये पितृ प्रेम को अधिक समय तक रोक नहीं पाये । कृष्णा वर्मा जी ने अपने उस पिता को याद किया,जिन्हें उन्होंने बचपन में ही खो दिया था । अपनी कविता “ तुम्हें नहीं देखा कभी “ को टपकते अश्रु और रूँधते गले के कारण पूरा नहीं पढ़ पाईं कृष्णा जी। दीपक राजदान ने बड़ी स्पष्टता से कहा कि ये मेरी हिन्दी की पहली कविता है । उन्होंने “ पिता जी मेरे पहले दोस्त “ कविता के साथ साथ कुछ संस्मरण भी साँझा किये । डा. बन्दिता सिन्हा ने अपने चिरपरिचित अंदाज़ में गमगीन माहौल को अपने पिता संग बचपन की याद को साँझा करते हुए ख़ुशनुमा बना दिया । योगेश ममगाईं ने अपने स्वर्गीय पिता से अंतिम समय न मिल पाने के दुःख को अपनी कविता “ हे तात बस तुम्हीं नहीं थे “ के माध्यम से प्रकट किया । माहौल पुनः पिता की यादों की धुंध में सभी को घेरने लगा था ।विषय ही कुछ ऐसा था कि हृदय से फूटती हर याद झरना बन आँखों से फूट रही थी । प्रतिष्ठित कवि प्रसाद दिव्यम द्वारा पुत्र से पिता तक के सफ़र को संस्मरण व कविता के माध्यम से दर्शाया गया । उन्होंने कहा की आदमी ऐश सिर्फ़ पिता के ही कैश पर कर सकता है क्योंकि एक वही व्यक्ति है जो अपने बच्चों की ख़ुशियों के लिये अपना सर्वस्व लगा सकता है । मंच पर अब बारी थी हिन्दी राइटर्स गिल्ड की संस्थापक निदेशिका व हिन्दी को वैश्विक पटल पर अग्रणी बनाने में उल्लेखनीय भूमिका निभा रही डा. शैलजा सक्सेना की। उन्होंने अपने साधारण से असाधारण दो दो पिताओं ( पिता व पिता तुल्य ससुर ) को अपने वक्तव्य के माध्यम से उन्हें विशिष्ट पिताओं के रूप में परिभाषित किया । फिर मंच पर राकेश मिश्र जी को आमंत्रित किया गया जो गिल्ड के नियमित श्रोता के रूप में जाने जाते हैं । सुनने व पढ़ने के धनी मिश्र जी, पिता पर अपने जीवन की पहली कविता लिखने से स्वयं को रोक नहीं पाये । वे पिता के लिये लिखते हैं कि “ हर पेड़ की जड़ें इतनी गहरीं हों, कि मिट्टी से दूर रह कर भी पेड़ हरा रहे” । कामिनी सिंह जी ने “ पापा मेरी जड़ें, मेरा गर्व “ पर अपनी भावनाएं व्यक्त की। गिल्ड की निदेशिका लता पांडे ने “पापा की चाय” के माध्यम से खुद भी भावुक होते हुए सबको अपने अपने अश्रु पोंछने पर मजबूर कर दिया। राज माहेश्वरी जी ने पितृ दिवस पर “सीख बच्चे की “ पर अपने विचार प्रकट किये। अब बारी थी एक ऐसे बच्चे की जिसने अपने पापा पर स्व रचित कविता “ Papa you the best” सुनाई । सभी ने डा. निधि सक्सेना के संस्कारित बेटे शिवांग राठौर की कविता व विचारों पर तालियाँ बजा कर खूब प्रोत्साहित किया। अब मंच को सम्भालने की बारी थी डॉ नरेन्द्र ग्रोवर जी की। ग्रोवर जी ने अपनी कविता के माध्यम से कहा का जो खड़ा रहा अड़ा रहा वही पिता है। पिता का परिवार के लिये खड़े व अड़े रहने की ये तटस्थता ही उसे दुनिया में सबसे सशक्त बनाती है । तत्पश्चात ग्रोवर जी ने गिल्ड संस्था के वरिष्ठ संस्थापक निदेशकों में से एक विक्रांत जी को सादर मंच पर आमंत्रित किया । जिन्होंने अपने व अपने पिता से जुड़े संस्मरणों से सभी को भाव विभोर कर दिया। संदीप सिंह ने अपनी कविता “ पापा आप की छाप” में कहा, कि जिस वृक्ष का प्रसार दिखे आसमान में, उसकी गहराई छुपी है मैदान में । अब आये विनोद जी जिन्होंने स्वरचित गीत जो पिता स्वरूप भगवान शिव पर आधारित है गाया । जिसकी सभी ने सराहना की । इसके बाद आदित्य राठौर जी ने भी अपने पिता से जुड़े कुछ भावपूर्ण संस्मरण साँझा किये। दीपक राजदान जी ने एक बहुत ही मार्मिक व महत्वपूर्ण विषय पर सभी का ध्यानाकर्षण चाहा कि उन बच्चों का क्या जिन्होंने बहुत कम उम्र में अपने पिता का साया खो दिया हो। पिता की कमी को कोई भी पूरा नहीं कर सकता परन्तु एक ऐसे ही बच्चे का सहारा बन किस प्रकार से उन्होंने व साथियों ने मिलकर उसकी आर्थिक तनाव से उबारा , इस संदेश के माध्यम से सभी को जागरूक करने का दीपक जी का प्रयास सभी को आत्म विभोर कर गया। जानेमाने साहित्यकार व फ़िल्म निर्माता जगमोहन सांगा जी हिन्दी राइटर्स गिल्ड के इस ऐतिहासिक कार्यक्रम को देख अपनी भावनाओं को रोक नहीं पाये व उन्होंने भी अपने पिता के उन अनुभवों को साँझा किया जिसे उन्हें इन्हें व्यक्त करने का ऐसा अवसर नहीं मिल पाया। सांगा जी के साथ पधारे पंजाबी कवि व गायक इक़बाल बरार जी ने “बाबुल की दुआएँ ले ती जा , जा तुझ को सुखी संसार मिले “ गाकर पिता का पुत्री के प्रति प्रेम प्रकट किया ।
अंत में डॉ शैलजा सक्सेना ने सभी का धन्यवाद व्यक्त किया व डॉ बन्दिता सिन्हा व कामिनी सिंह का जलपान के लिये धन्यवाद किया साथ ही कृष्णा वर्मा व किन्हीं कारणों से अनुपस्थित रह प्रीति अग्रवाल जी का इस कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिये सराहा। शैलजा जी ने गिल्ड की तकनीकी निदेशिका पूनम चन्द्रा मनु का धन्यवाद करते हुए कहा कि हमारे किसी भी कार्यक्रम का आग़ाज़ व अंत उन्हीं के हाथों से होता है । वो जिस तन्मयता से यूट्यूब व फ़ेसबुक पर हमें और भी आकर्षक बना कर प्रस्तुत करती हैं ये उनकी तकनीकी कुशलता व संस्था के प्रति निष्ठा को दर्शाता है ।
योगेश ममगाईं
सह निदेशक HWG

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