भारत की प्रसिद्ध ऐतिहासिक तथा पौराणिक माताएँ
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मातृ दिवस के अवसर पर 16 मई 2026 की दोपहर 1:00 से 4:00 तक स्प्रिंगडेल ब्रांच
लाइब्रेरी, ब्रैंपटन में राइटर्स गिल्ड कैनेडा ने एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया। इस
कार्यक्रम में संस्था के सदस्यों ने भारत की ऐतिहासिक तथा पौराणिक माताओं के संबंध में
वक्तव्य प्रस्तुत किए। इसमें हिन्दी राइटर्स गिल्ड के सदस्यों ने अत्यंत उत्साह के साथ भाग
लिया।
सर्वप्रथम डॉक्टर शैलजा सक्सेना ने सभा में उपस्थित सभी का स्वागत किया और गोष्ठी के
विषय में बताया। इसके उपरांत हमारे टोरंटो के एक वरिष्ठ हिंदी प्रेमी और कनाडा की एक
महत्वपूर्ण हिंदी पत्रिका चेतना के संस्थापक श्री श्याम त्रिपाठीजी के निधन पर उनके लिए
श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए सबने एक मिनट के मौन का पालन किया।
इसके बाद शैलजा जी ने इस गोष्ठी की प्रथम संचालक श्रीमती आशा बर्मन को मंच पर
आमंत्रित किया ।
प्रत्येक बार हम लोग अपने मासिक कार्यक्रम में प्रयत्न करते हैं कि किसी साहित्यिक पुस्तक
की चर्चा की जाए। इस बार हमारे कार्यक्रम के प्रारंभ में राकेश मिश्र जी ने गोविन्द मिश्र के
उपन्यास 'पांच आंगनों का घर' नामक पुस्तक की चर्चा की। उपन्यास का एक महत्वपूर्ण पक्ष
इसके स्त्री पात्र भी हैं। जोगेश्वरी, शांति और अगली पीढ़ी की स्त्रियाँ अपने-अपने समय के अनुरूप
सशक्त, सजग और निर्णायक हैं। वे केवल सहायक पात्र नहीं, बल्कि कथा को दिशा देने वाली प्रमुख
शक्ति हैं। भाषा की दृष्टि से गोविन्द मिश्र का लेखन सरल, प्रवाहपूर्ण और अत्यंत चित्रात्मक है। कथा
कहीं भी बोझिल नहीं होती, बल्कि चलचित्र की भाँति सहजता से आगे बढ़ती है। यही कारण है कि पाठक
बिना किसी प्रयास के इस दुनिया में डूबता चला जाता है। इस उपन्यास को पढ़ना वास्तव में एक ऐसे घर
में प्रवेश करना है, जिसकी स्मृतियाँ पढ़ने के बाद भी लंबे समय हमारे भीतर जीवित रहती है यह
वक्तव्य इतना रोचक था कि सबने इस प्रयास की सराहना की।
इसके पश्चात हमारा मातृ दिवस कार्यक्रम आरंभ हुआ। सबसे पहले वंदिता सिन्हा जी ने भगत
सिंह की माता विद्यापति के संबंध में बताया । विद्यापति जी का पूरा जीवन अनेक
विडम्बनाओं और झंझावातों के बीच बीता। भगत सिंहके सम्बन्ध में उन्होंने कहा
नमन है उस माँ को , बार बार नमन,
जिसने दिया हमें भगत सिंह जैसा रतन ।
हमारी अगली प्रस्तुति एक छोटी सी नाटिका थी, जिसे डॉक्टर कनिका वर्मा ने प्रस्तुत किया।
महान कवि मैथिलीशरण गुप्त ने ‘कैकेयी का अनुताप’ में कैकेयी के भीतर छिपी उस माँ, उस स्त्री, और
उस पश्चाताप से भरे मन को स्वर दिया है, जिसे इतिहास ने बहुत कम सुना है। कैकेयी की उसी
आत्मग्लानि, उसके द्वंद्व, और उसके हृदय की पीड़ा को कनिका वर्मा ने प्रस्तुत किया एकालाप के
माध्यम से, जिसमें पश्चाताप से व्याकुल कैकेयी राम से क्षमा की याचना करती है और अपने निर्णयों के
पीछे छिपी मानवीय पीड़ा को उजागर करती है। यहाँ कैकेयी केवल एक दोषी रानी नहीं, बल्कि अपने ही
किए पर रोती, पछताती और न्याय मांगती एक विवश माँ है। उनके प्रभावशाली अभिनय ने दर्शकों
को मुग्ध कर दिया।
अगली वक्ता थीं पूनम चंद्रा’मनु’; जिन्होंने रानी दुर्गावती के जीवन के संबंध में एक वक्तव्य
प्रस्तुत किया कि वे बहुत साहसी महिला थीं , जिन्होंने किस प्रकार माँ होते हुए भी युद्ध
क्षेत्र में जाकर देश की रक्षा कर देशभक्ति का परिचय दिया। उनकी कहानी सुनने पर सबको
रानी लक्ष्मीबाई की याद आ गई ।
इसके बाद प्रीति अग्रवाल ने गौतम बुद्ध की पत्नी यशोधरा के संबंध में अपनी वार्ता प्रस्तुत
की। प्रीति अग्रवाल जी ने एक चोका द्वारा गौतम बुद्ध की पत्नी यशोधरा का स्मरण किया।
उन्होंने कहा कि वे एक आदर्श माता और पत्नी थीं। यशोधरा ने गौतम बुद्ध के निर्णय का
समर्थन किया और सिद्ध कर दिया कि आध्यात्मिकता केवल ध्यान में नहीं , स्वीकार में भी
होती है। अच्छे लालन पालन के साथ साथ उन्होंने अपने पुत्र राहुल को मूल्य दिए , संयम
दिया और अंततः अपने पिता के दिखाए मार्ग पर चलने का साहस भी दिया। मन में कोई रोष
नहीं था और उन्होंने अपने पुत्र राहुल को अपने पति विषय में बताया था कि वे सत्य की खोज
में गए हैं।
अगली प्रस्तुति थी प्रतिभा सिवाच की, जिन्होंने कैकई के बारे सकारात्मक रूप से लिखा कि
राम के प्रति कैकई का कठोर व्यवहार था, तभी राम राम बन सके। उन्होंने बताया कि किस
प्रकार मंथरा पृथ्वी पर इसीलिए आई थी ताकि वह कैकेयी की मति भ्रष्ट कर सके। उनकी
प्रस्तुति में नयापन था जो दर्शकों को अच्छा लगा।
इसके बाद डॉक्टर शैलजा सक्सेना ने सीता माता के संबंध में अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया।
उन्होंने बताया कि किस प्रकार उनका मातृ रूप दो तरह से विकसित होता है, एक जगत जननी
के रूप में और दूसरा अपने बच्चों लव कुश को पालने के संबंध में। उन्होंने यह भी बताया कि
विश्व में कई देशों में जहां राम कथा है ,सीता को किस प्रकार भिन्न-भिन्न रूपों में दिखाया
गया है।
इसके बाद आशा मिश्रा जी ने यशोदा जी के कृष्ण जी के प्रति प्रेम को सूरदास जी तथा
हरिऔध जी के काव्य के माध्यम से प्रस्तुत किया, जो सबको बहुत अच्छा लगा। इसके पश्चात
आशा जी ने श्री नरेंद्र ग्रोवर जी को संचालन के लिए आमंत्रित किया।
नरेंद्र ग्रोवर जी ने सर्वप्रथम कृष्णा वर्मा जी को मंच पर आमंत्रित किया। उन्होंने अमृता देवी
विश्नोई जी के संबंध में अपनी वार्ता प्रस्तुत की।
भारतीय इतिहास में ऐतिहासिक माताओं के बलिदान के उल्लेख में एक अद्वितीय नाम है
अमृता देवी बिश्नोई का। जिन्होंने राजस्थान के थार रेगिस्तान के जिलों में पाए जाने वाले
खेजड़ी पेड़ों को बचाने के लिए 12 सितंबर, 1730 में हुए आंदोलन में अमृता देवी और उनकी
ती्नों बेटियों ने सबसे पहले खेजड़ी वृक्षों से चिपककर अपना सिर कटा लिया था। उनके साथ
363 लोगों ने भी अपने प्राणों का बलिदान दिया। यह आंदोलन 20वीं शताब्दी के चिपको
आंदोलन का अग्रदूत माना जाता है।
इसके पश्चात आशा बर्मन जी मंच पर आयीं और उन्होंने स्वामी विवेकानंद जी की गुरुपत्नी
शारदा देवी के संबंध में अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया। शारदा माँ को भारतवर्ष के रामकृष्ण
मिशन तथा सारे विश्व की वेदांत सोसाइटी की शाखाओं में जगत जननी के रूप में पूजा जाता
है। वे एक धर्मपरायण, करुणामयी और कर्मठ महिला थीं। ठाकुर रामकृष्ण जी उनको अपनी
‘शक्ति’ मानते थे, वे विधिवत उनकी पूजा भी करते थे। वक्तव्य के अंत में आशा जी ने शारदा मां
के संबंध में एक भजन भी प्रस्तुत किया।
हमारी अगली वक्ता सरस दरबारी जी ने माता गुजरी के संबंध में सबको बताया। वे इतिहास की
एकमात्र ऐसी महिला हैं जिन्होंने अपने पति (गुरु तेग बहादुर जी), पुत्र (गुरु गोबिंद सिंह जी),
और चारों पोतों (चार साहिबजादे) को धर्म और मानवता की रक्षा के लिए बलिदान होते देखा
और उनके बलिदान का हिस्सा बनी। माता गुजरी को एक ऐसी "आयरन लेडी" के रूप में याद
किया जाता है, जिनके परिवार ने धर्म और मानवता की रक्षा के लिए अपना सब कुछ
न्योछावर कर दिया।
इसके उपरांत ग्रोवर जी ने सुषमा रानी जी के माता द्रौपदी के संबंध में वार्ता प्रस्तुत करने के
लिए आमंत्रित किया। उन्होंने विस्तारपूर्वक द्रोपदी के संपूर्ण जीवन की कथा सबको बताई और
उनके साहस, त्याग और दृढ़ता की सराहना की।
अंत में पीयूष जी ने अपनी धीर-गंभीर वाणी में एक अद्भुत सुंदर रचना प्रस्तुत की। रावण की
पत्नी मंदोदरी के मन की विडंबना और रावण के बदलते व्यक्तित्व के प्रति उनके मानसिक
कष्ट को एकालाप के माध्यम से प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम के अंत में ग्रोवर जी मंच पर आए और उन्होंने सभी दर्शकों और प्रतिभागियों को
धन्यवाद दिया तथा इस सभा में अल्पाहार देने के लिए आशा बर्मन तथा आशा मिश्रा जी को
धन्यवाद दिया।अंत में डाक्टर शैलजा सक्सेना ने आज की सभा के दोनों संचालकों आशा बर्मन
तथा नेरेंद्र ग्रोवर जी को धन्यवाद दिया।
भुवनेश्वरी जी ने पन्ना धाय तथा उषा रानी बंसल जी ने सुमित्रा पर लिखे अपने लेख, प्रत्यक्ष
उपस्थित न हो सकने के कारण ऑडियो रूप में ग्रुप में डाले। इन दोनों के सुंदर और दृढ़ माता
रूप पर उनके शोधपत्र ज्ञानवर्धक हैं।
आज के कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि हमने मातृ दिवस के अवसर पर भारतवर्ष
की प्रसिद्ध माताओं का स्मरण किया, उनके विषय में जाना। इस कार्यक्रम में वार्ताओं की
प्रस्तुतियों में गीत, भजन और नाटक सभी विधाओं का समावेश था। इस प्रकार हमारे इस हिंदी
राइटर्स गिल्ड की गोष्ठी का सुंदर समापन हुआ।